"स्कूल ठीक करो" अभियान में दिल्ली से सिवान निकला युवक!
दिल्ली से सिवान जा रहा एक युवक इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उसका मकसद सिर्फ गांव लौटना नहीं, बल्कि रास्ते में आने वाले स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेना और उनकी कमियों को सामने लाना है। यह पहल ‘School Thik Karo’ अभियान से जुड़ी है।


एक ट्रेन टिकट लिया और दिल्ली से निकल पड़ा सिवान। मंजिल घर जरूर है, लेकिन इस बार घर से पहले स्कूल है। CJP के X हैंडल पर पोस्ट हुए एक वीडियो में एक युवक कुछ ऐसा ही मिशन लेकर अपने पैतृक गांव लौटने की बात करता नजर आ रहा है। उसका कहना है कि वह सिवान के स्कूलों में जाकर देखेगा कि बच्चों को पढ़ने के लिए जरूरी सुविधाएं मिल भी रही हैं या नहीं। जिस गांव से उसके माता-पिता बेहतर जिंदगी और पढ़ाई की तलाश में दिल्ली चले गए थे, उसी गांव में अब वह वापस लौट रहा है।
‘स्कूल की कमी देखूंगा, फिर उसे पूरा करने की कोशिश करूंगा’
युवक कैमरे के सामने कहता है कि वह दिल्ली से सिवान अपने पैतृक गांव जा रहा है। उसका कहना है कि उसके माता-पिता भी बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में सिवान से बहुत साल पहले दिल्ली आए थे। अब वह अपने गांव लौटकर वहां के स्कूलों की बुनियादी जरूरतों को खुद देखने और कमियों को सामने लाने की कोशिश करेगा। उसका फोकस सिर्फ अपने गांव के स्कूल तक सीमित नहीं है। वीडियो में वह कहता है कि सिवान में पड़ने वाले स्कूलों में जाकर वह यह देखने की कोशिश करेगा कि वहां बच्चों को जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। यानी इस पूरी पहल का आइडिया सीधा है- स्कूल को सिर्फ बाहर से देखने के बजाय उसके अंदर जाकर यह देखना कि बच्चे वास्तव में किन सुविधाओं के बीच पढ़ रहे हैं।
क्या है ‘School Thik Karo’ मुहिम?
वीडियो शेयर करते हुए Cockroach Janta Party ने इसे #SchoolThikKaro अभियान से जोड़ा है। अभियान के तहत लोगों से अपने आसपास के सरकारी स्कूलों का खुद जायजा लेने की अपील की गई है। अभियान में लोगों से स्कूल जाकर वहां की बुनियादी सुविधाओं की जांच करने, कमियों की तस्वीरें लेने और अपनी रिपोर्ट स्थानीय अधिकारियों, सरपंच, BDO और स्कूल के प्रधानाध्यापक के साथ साझा करने को कहा गया है। अभियान का दावा है कि ऐसी रिपोर्ट को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाएगा। Cockroach Janta Party की वेबसाइट पर भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अभियान के प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।
दरसल, पार्टी का कहना है कि बीते सालों में नया संसद बन गया, नया PM दफ़्तर बन गया पर गाँव के स्कूल वैसे के वैसे ही है. आज़ादी के 80 साल के बाद भी स्कूलों में बच्चे पानी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे है. उनका कहना है इस स्वतंत्रता दिवस हम ख़ुद ही जागरूक नागरिक बन कर ख़ुद ही गाँव के स्कूलों को ठीक करने का कदम उठाये.
‘School Thik Karo’ अभियान ऐसे समय में सामने आया है, जब स्वतंत्रता दिवस को लेकर देशभर में कार्यक्रम हो रहे हैं। अभियान स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते हुए लोगों से खुद मैदान में उतरकर स्थिति देखने की अपील कर रहा है।

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