बच गई मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी! सुप्रीम कोर्ट ने की थी टिप्पणी, एक इस्तीफे ने पलट दिया पूरा मामला
पिछले कई दिनों से बिहार की राजनीति में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में था। अब एक फैसले ने उस पूरे सियासी समीकरण को बदल दिया है।


पटना: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जिस घटनाक्रम पर सबकी नजर टिकी हुई थी, अब उसका आखिरी अध्याय भी पूरा हो गया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उनका मनोनयन हो गया। इसके साथ ही उनके मंत्री पद पर बना संवैधानिक संकट भी अब खत्म हो गया। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर एक MLC बनने की खबर इतनी बड़ी क्यों है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
आखिर मामला था क्या?
दीपक प्रकाश नवंबर 2025 से बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। लेकिन उस समय वे न विधानसभा के सदस्य थे और न ही विधान परिषद (MLC) के। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने ज्यादा से ज्यादा 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इसके बाद उसे किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य हो जाता है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया कि आखिर संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद यह स्थिति क्यों और कैसे बनी रही। बस, फिर क्या था, यहीं से मामला राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
फिर अचानक एक इस्तीफा... और बदल गया पूरा समीकरण
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद ही भाजपा के MLC देवेश कुमार ने 31 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था, लेकिन उनके इस्तीफे से राज्यपाल मनोनीत कोटे की एक सीट खाली हो गई।अब उसी खाली सीट के लिए बिहार सरकार ने दीपक प्रकाश का नाम भेजा, जिस पर राज्यपाल ने अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद दीपक प्रकाश आधिकारिक तौर पर विधान परिषद के सदस्य (MLC) बन गए है।
अब मंत्री पद पर नहीं रहेगा कोई संवैधानिक सवाल
MLC बनने के बाद दीपक प्रकाश जल्द ही पद और गोपनीयता की शपथ लेने वाले हैं। इसके साथ ही उनके पद पर जो संवैधानिक सवाल बना हुआ था अब वह खत्म हो जाएगा। गौरतलब है कि दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। बेटे के MLC बनने पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि फैसला तो पहले से ही तय था औपचारिकता अभी हुई है। उन्होंने इसके लिए NDA के सभी सहयोगी दलों का आभार भी जताया।
पिछले कुछ दिनों से बिहार की राजनीति में यही सवाल गूंज रहा था कि क्या दीपक प्रकाश मंत्री बने रह पाएंगे यह संवैधानिक सवालों से हारकर हटा दिए जाएंगे? अब राज्यपाल की मंजूरी और MLC मनोनयन के बाद इस सवाल का जवाब मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस फैसले का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

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