Lunar Eclipse: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी होली के ठीक एक दिन पहले लगने वाला है. आज हमें पूर्ण चंद्र ग्रहण भी देखने को मिलेगा. ग्रहण की शुरुआत 3 बजकर 20 मिनट से होगी. जो 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इस बीच पूर्ण चंद्र ग्रहण हमें करीब एक घंटे के लिए दिखाई देगा. जिसे 4 बजकर 34 मिनट से 5:33 तक देखा जा सकेगा.
चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है. जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के ठीक बीच में होती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है, जिससे वह धुंधला हो जाता है और कभी-कभी कुछ घंटों के लिए चंद्रमा की सतह चमकीले लाल रंग की हो जाती है. प्रत्येक चंद्र ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से दिखाई देता है.
पूर्ण चंद्र ग्रहण, चंद्रमा का रंग नारंगी या लाल क्यों?
चंद्रमा पृथ्वी की छाया के भीतरी भाग, यानी अम्ब्रा में प्रवेश करता है. पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली कुछ सूर्य की किरणें चंद्रमा की सतह तक पहुंचती हैं, जिससे वह मंद रूप से प्रकाशित होता है. नीले और बैंगनी जैसे कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग, लाल और नारंगी जैसे अधिक तरंगदैर्ध्य वाले रंगों की तुलना में अधिक आसानी से बिखर जाते हैं. क्योंकि ये अधिक तरंगदैर्ध्य पृथ्वी के वायुमंडल से गुजर जाते हैं और कम तरंगदैर्ध्य बिखर जाते हैं, इसलिए चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा नारंगी या लाल रंग का दिखाई देता है. ग्रहण के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में जितनी अधिक धूल या बादल होंगे, चंद्रमा उतना ही अधिक लाल दिखाई देगा.
आंशिक चंद्र ग्रहण
सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के अपूर्ण संरेखण के कारण चंद्रमा पृथ्वी की छाया के केवल एक हिस्से से ही गुजरता है. छाया बढ़ती है और फिर कम हो जाती है, लेकिन चंद्रमा को पूरी तरह से कभी नहीं ढक पाती. इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
उपछाया ग्रहण
यदि आपको इसके बारे में जानकारी नहीं है, तो आप इसे देखने से चूक सकते हैं. चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया, यानी उसकी हल्की बाहरी छाया से होकर गुजरता है. चंद्रमा इतना धुंधला हो जाता है कि इसे देखना मुश्किल हो सकता है.
अगला चंद्र ग्रहण अगस्त में
साल का पहला चंद्र ग्रहण मार्च की 3 तारीख को करीब साढ़े तीन घंटे के लिए लगने वाला है. इसे भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, प्रशांत क्षेत्र और उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा. भारत में, सूर्यास्त के समय चंद्रमा उदय के आसपास ग्रहण का केवल अंतिम चरण ही दिखाई देगा.
वहीं अगला चंद्र ग्रहण (आंशिक) अगस्त के माह में देखने को मिलेगा. हालांकि इसकी दृश्यता भारत में नहीं होगी. इसे East Pacific, Americas, Europe और Africa में देखा जा सकेगा.








