Jharkhand (Ranchi): गरीबों के लिए संजीवनी कहे जाने वाला रांची का सदर अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के लिए देश में सर्वश्रेष्ठ है । अस्पताल में गरीबों के लिए इलाज मुफ़्त में आयुष्मान भारत योजना के जरिए होता है । वही भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल में ही कैंटीन की व्यवस्था की गई थी। यहां सस्ते दर पर लोगो को 3 टाइम का खाना मिलता था जो राहत की बात थी । लेकिन अब इस व्यवस्था पर भी LPG क्राइसिस की मार पड़ने लगी है। रांची के सदर अस्पताल में आहार कैंटीन कई वर्षों से चल रहा है। इस कैंटीन से हर रोज 300 लोग लगभग खाना खाते हैं। न सिर्फ मरीज और उनके परिजन बल्कि डॉक्टर और अस्पताल कर्मी के भी भोजन की व्यवस्था यहां की जाती है। ऐसे में अस्पताल में जिस एजेंसी को टेंडर दिया है उसकी जिम्मेदारी थी कि कम दर पर लोगों का पेट भरे। लेकिन आज देश में चल रहे एलपीजी क्राइसिस की मार अब एजेंसी के पेट पर भी पड़ रही है। एलपीजी गैस एजेंसी कमर्शियल सिलेंडर को रेट बढ़ाकर बेच रही है जिसके कारण कैंटीन संचालक भी परेशान है। बढ़े हुए रेट का बोझ अब कैंटीन संचालक ने मरीजों की थाली पर डाल दिया है । समोसे और चावल के रेट में वृद्धि हो गई है। समोसा जो आम लोगों के लिए पेट भरने का सबसे आसान माध्यम होता है उसे ₹10 से बढ़ाकर ₹12 कर दिया गया है। वही चावल के रेट में भी ₹10 बढ़ा दिए गए हैं। डॉक्टर और कर्मियों पर शायद इसका बोझ ना पड़े लेकिन मरीज और उनके परिजन जो गरीब होते हैं उनको इस चीज से जरूर फर्क पड़ेगा ।
कैंटीन संचालक मुकेश कुमार भी कहते हैं की जैसी स्थिति है ऐसे में अब कैंटीन चलाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है। या तो इस रेट से कैंटीन चलेगा या फिर बंद करने की नौबत भी आ सकती है। बढ़े हुए रेट के बाद सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने खुद गैस एजेंसी से बात की लेकिन सिलेंडर की जो क्राइसिस है उसका कोई निदान नहीं निकला है।
अब ऐसे में जहां हर रोज गरीब और पिछड़े लोगों के स्वास्थ्य का सहारा सदर अस्पताल बन रहा है वहां इस महंगाई के मार लोग कैसे झेल पाएंगे यह कह पाना मुश्किल है। लेकिन उम्मीद है की आने वाले समय में इस रेट को भी वापस पहले जैसा कर दिया जाएगा।






