लक्ष्मण मांझी ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन का फूंका पुतला, आरक्षण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन!
समाहरणालय के मुख्य गेट पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और मंत्री संतोष कुमार सुमन का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।


गयाजी: गया के ऐतिहासिक गांधी मैदान से बुधवार को आरक्षण में वर्गीकरण के विरोध में जन सुराज नेता और बोधगया विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी लक्ष्मण मांझी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया। मार्च गया समाहरणालय के मुख्य गेट तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन का पुतला दहन किया। इस दौरान आरक्षण में वर्गीकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
गांधी मैदान से समाहरणालय तक निकला मार्च
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जन सुराज कार्यकर्ताओं के साथ महिला और पुरुष शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में वर्गीकरण किए जाने और भविष्य में आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त किए जाने की आशंका को लेकर अपना विरोध जताया। पुतला दहन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और संबंधित नेताओं के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरक्षण का लाभ वंचित और पिछड़े वर्गों के लोगों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
आरक्षण का उद्देश्य वंचितों को मुख्यधारा में लाना
मीडिया से बातचीत में लक्ष्मण मांझी ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य उन लोगों को मुख्यधारा में लाना है, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण का लाभ धीरे-धीरे कुछ परिवारों तक सीमित होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण में वर्गीकरण की मांग की जा रही है तो ऐसे नेताओं को अपने पदों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए। लक्ष्मण मांझी ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने वाले लोग अपने परिवार और करीबियों को राजनीतिक लाभ पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि समाज अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुका है और राजनीतिक बंटवारे को स्वीकार नहीं करेगा। इसी मुद्दे को लेकर विरोध मार्च और पुतला दहन किया गया है।
अपनी सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
प्रदर्शन के दौरान लक्ष्मण मांझी ने अपने खिलाफ कथित बयानबाजी और टिप्पणियों को लेकर पुलिस से शिकायत करने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि उनकी जान-माल को खतरा है और उनके पास कुछ दस्तावेज भी हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर पुलिस या संबंधित अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने जीतन राम मांझी और संतोष कुमार सुमन पर गंभीर आरोप लगाते हुए किसी अप्रिय घटना की आशंका भी जताई। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है।
पुतला दहन के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में वर्गीकरण के विरोध में अपनी मांग दोहराई और सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अपील की।
(जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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