JPSC-JSSC Protest : जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने भरी हुंकार, CBI-ED जांच की मांग पर आर-पार के मूड में युवा

RANCHI/JHARKHAND: राजधानी रांची में सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को पूरे जोश के साथ 10वें दिन में प्रवेश कर गया।
अपनी जायज मांगों को लेकर आर-पार के मूड में उतरे इन छात्रों ने स्टेडियम परिसर में एक विशाल फ्लैग मार्च निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया। फ्लैग मार्च के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभ्यर्थियों ने सरकार को खुली चेतावनी देते हुए अपने आंदोलन की आगे की आक्रामक रणनीति साझा की।
TDPL की परीक्षाएं और JSSC CGL रद्द करने पर अड़े छात्र
छात्रों का साफ तौर पर आरोप है कि झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पैसों का लेनदेन हुआ है। उनकी सबसे बड़ी नाराजगी परीक्षा आयोजित करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) को लेकर है।
अभ्यर्थियों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि TDPL द्वारा आयोजित JPSC की पीटी (PT) परीक्षा, बैकलॉग और अन्य सभी रेगुलर परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। इसके साथ ही छात्रों ने JSSC CGL परीक्षा में भी भारी धांधली का आरोप लगाते हुए उसे भी रद्द करने की मांग दोहराई है।
CBI और ED जांच की बड़ी मांग
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि इन परीक्षाओं के पीछे जो 'सेटिंग' और धांधली का खेल हुआ है, उसका सच जनता के सामने आना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग रखी है। छात्रों का कहना है कि जब तक असली दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, उनका यह सत्याग्रह रुकने वाला नहीं है।
सरकार के सामने रखीं ये 2 बड़ी शर्तें
फिक्स परीक्षा कैलेंडर: JPSC और JSSC की सालों से अटकी परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ कराने के लिए सरकार तुरंत एक फिक्स एग्जाम कैलेंडर जारी करे और उसी समय सीमा पर परीक्षाएं ली जाएं।
गैर-राजनीतिक आयोग: परीक्षा आयोजित कराने वाले आयोग (JPSC/JSSC) के अध्यक्ष या सदस्य किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं होने चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
"मांगें मानो, आंदोलन खत्म..."
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे युवाओं ने सरकार को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर उनकी ये सभी मांगें मान ली जाती हैं, तो वे खुशी-खुशी अपना आंदोलन वापस ले लेंगे। लेकिन जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित मुहर नहीं लगाती, उनका यह धरना-प्रदर्शन यूं ही अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा।
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