'ड्यूटी ऑवर्स में कहां गायब रहते हैं डॉक्टर साहब?', पलामू में प्राइवेट क्लीनिक में मोटी फीस छापने में मस्त हैं सरकारी डॉक्टर!
सरकारी व्यवस्था के भरोसे दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने पहुंचे गरीब मरीज ओपीडी में डॉक्टरों का घंटों इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि वही डॉक्टर चंद कदमों की दूरी पर अपने प्राइवेट क्लीनिकों में मोटी फीस लेकर परामर्श देते नजर आते हैं।

Palamu News: पलामू के सदर अस्पताल और मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात कुछ सरकारी चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ओपीडी के निर्धारित समय और सरकारी ड्यूटी के दौरान कई डॉक्टर अस्पताल से नदारद रहकर अपने निजी क्लीनिकों में धड़ल्ले से मरीज देख रहे हैं। सरकारी व्यवस्था के भरोसे दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने पहुंचे गरीब मरीज ओपीडी में डॉक्टरों का घंटों इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि वही डॉक्टर चंद कदमों की दूरी पर अपने प्राइवेट क्लीनिकों में मोटी फीस लेकर परामर्श देते नजर आते हैं।
अस्पताल परिसर के मुहाने पर सजे हैं नेमप्लेट वाले क्लीनिक
इस पूरे मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर सरकारी डॉक्टरों के नाम की चमचमाती नेमप्लेट लगे निजी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2016 में जारी स्पष्ट सर्कुलर में यह साफ निर्देशित किया गया था कि सरकारी अस्पतालों के ठीक पास निजी प्रैक्टिस पर सख्त पाबंदी और दूरी से जुड़े कड़े नियम लागू होंगे। इसके बावजूद अस्पताल की चहारदीवारी के ठीक बाहर खुलेआम निजी क्लीनिकों का संचालन नियमों की खुली खिल्ली उड़ा रहा है।

प्रबंधन और सिविल सर्जन की खामोशी पर उठे सवाल
इस मनमानी के सामने आने के बाद अब सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन और जिले के सिविल सर्जन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। क्या प्रशासन को इस बात की कोई खबर नहीं है कि अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी ऑवर्स में कहां रहते हैं? क्या कभी इन निजी क्लीनिकों और डॉक्टरों की औचक जांच की गई है? जानकारों का कहना है कि पूरे मामले में ड्यूटी रोस्टर, डॉक्टरों के बायोमेट्रिक व फिजिकल अटेंडेंस, अस्पताल से क्लीनिक की तय दूरी और ओपीडी के समय निजी क्लीनिक में मौजूद रहने वाले डॉक्टरों की निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है।

जनता की सेवा या सिर्फ निजी मुनाफे की चिंता?
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और सुलभ इलाज का सपना देखकर आने वाली जनता के हक पर यह सीधा डाका है। सरकार से लाखों की तनख्वाह, भत्ते और सुविधाएं लेने के बाद भी अगर सरकारी समय का इस्तेमाल निजी कमाई के लिए किया जा रहा है, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बड़ा खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि पलामू स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन इन लापरवाह चिकित्सकों पर क्या ठोस कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करता है।
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