परिवार से कोई सरकारी नौकरी में है? अनुकंपा नौकरी पर बाद अपडेट! पटना हाई कोर्ट ने दूर किया confusion
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर लोगों के बीच लंबे समय से एक बड़ा भ्रम था। अब पटना हाई कोर्ट के एक फैसले ने इस नियम को बिल्कुल साफ शब्दों में समझा दिया है।


अगर आपके मन में भी यह सवाल उठता है की सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के किसी दूसरे सदस्य को अनुकंपा (Compassionate) नौकरी मिल सकती है या नहीं तो पटना हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुना कर आपकी कंफ्यूजन को दूर कर दिया है। हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर मृत कर्मचारियों के परिवार का कोई एक आश्रित पहले से नौकरी में है तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यानी की "वह भाई अब अलग रहता है", "घर का खर्च नहीं निकल पाता", यह इसकी जैसी अन्य दलीलें भी इस नियम को नहीं बदल सकेंगे।
क्या है पूरा मामला
2012 में दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल के बड़े भाई की प्रखंड कार्यालय में अनुसेवक के पद पर काम करते हुए मृत्यु हो गई थी। इसी के बाद अजीत कुमार मंडल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लेकिन 2016 में जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार का एक सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है इसीलिए नियम के अनुसार दूसरा सदस्य इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकता।
अजीत ने क्या दलील दी?
अजीत कुमार मंडल ने अपने पक्ष की बात रखते हुए अदालत में कहा कि जो भाई सरकारी नौकरी कर रहे हैं वह अलग रहते हैं और परिवार का कोई आर्थिक सहयोग नहीं करते हैं इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिलनी ही चाहिए। लेकिन अदालत ने राज्य सरकार को बताते हुए कहा कि बिहार सरकार की नीति और पहले के न्यायिक फैसलों के मुताबिक सिर्फ यह देखा जाएगा कि परिवार का कोई आशिक सरकारी नौकरी में है या नहीं। वह परिवार का खर्च उठाते हैं या साथ रहते हैं या नहीं यह कोर्ट की परेशानी नहीं है।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए क्या?
न्यायमूर्ति कुमार मनीष की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा की अनुकंपा नौकरी कोई विरासत या अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य केवल उसे परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देना है जिसके आय के मुख्य स्रोत की अचानक मृत्यु हो गई हो। इसलिए यदि परिवार का कोई आश्रित व्यक्ति सरकारी सेवा में पहले से है तो उस परिवार के किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा नौकरी नहीं दी जाएगी।

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