Jharkhand (Giridih): नौ दिनों की उपासना के बाद शनिवार को गिरिडीह में भक्तों ने भक्तिभाव के साथ आदिशक्ति मां दुर्गे को विदा किया। देवी मां की विदाई के समय एक रीति निभाई जाती है - खोइछा भरने की. महिलाओं की साड़ी के आंचल की एक छोर पर पीले चावल और कुछ सिक्कों आदि के साथ यह रस्म निभाई जाती है. जिसे आमतौर पर लड़की जब ससुराल जाती है, या मायके आती है तब निभाया जाता है. इस लोक प्रचलित नियम को माता की विदाई के वक्त भी हुबहू निभाया जाता है. स्थानीय महिलाओं ने माता का खोइछा भर कर यह रस्म अदा की.
विसर्जन की इस विधि के दौरान भक्ति से ओत प्रोत गानों के बीच सभी उत्साहित थे. वहीं प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरती. मुफ्फसिल थाना पूरी तरह अलर्ट मोड पर थी. रामनवमी की जुलूस को देखते हुए बिजली भी बाधित कर दी गई थी, ताकि कोई अनहोनी घटना न घटित हो. शहर के कोल्डीहा दुर्गा मंडप के साथ, सुभाष पब्लिक स्कूल दुर्गा मंडप, गांधी चौक के छोटकी दुर्गा मंडप और बरमसिया के रक्षित दुर्गा मंडप से लोग विसर्जन के लिए निकले और विभिन्न जलाशयों में विधिपूर्वक मूर्ति विसर्जन कर दिया गया. इस मनोकामना के साथ कि शारदीय नवरात्र में पुन: माता की आराधना का अवसर प्राप्त हो सकेगा. माता के जयकारे के साथ उन्हें सप्रेम विदाई दी गई.
रिपोर्ट: मनोज कुमार पिंटू









