बाहर आया तो गवाहों को धमकाएगा!, झारखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, धनबाद ACB केस में नहीं मिली राहत
धनबाद ACB के एनआरएचएम गबन मामले में आरोपी प्रमोद कुमार सिंह की नियमित जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई।

Jharkhand High Court ;राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के करोड़ों रुपये के कथित गबन मामले में आरोपी प्रमोद कुमार सिंह उर्फ प्रमोद सिंह को झारखंड हाईकोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की नियमित जमानत याचिका (Bail Plea) को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। यह पूरा मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) धनबाद थाना कांड संख्या 15/2019 से जुड़ा हुआ है, जिसमें सरकारी खजाने से भारी-भरकम राशि के गोलमाल की जांच चल रही है।
4.16 करोड़ रुपये के गबन का है सीधा आरोप
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया कि आरोपी प्रमोद सिंह पर 4.16 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि के सुनियोजित गबन में सीधे तौर पर संलिप्त रहने का पुख्ता आरोप है। अदालत ने माना कि मामला आम जनता के स्वास्थ्य और इलाज के लिए जारी किए गए भारी-भरकम बजट के दुरुपयोग से जुड़ा है, इसलिए ऐसे गंभीर आर्थिक अपराध में आरोपी को किसी भी तरह की तुरंत राहत नहीं दी जा सकती।
बाहर आया तो गवाहों को धमकाने का सताया डर
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एक और बेहद अहम पहलू पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि इस बहुचर्चित मुकदमे में कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी अदालत में दर्ज होने बाकी हैं। ऐसे में अगर आरोपी को इस मोड़ पर जेल से रिहा किया जाता है, तो वह बाहर आकर अपनी पहुंच और रसूख के दम पर गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की पूरी कोशिश कर सकता है।
जेल में ही कटेंगी रातें, शिकंजा हुआ और सख्त
अदालत ने अपने आदेश में साफ रेखांकित किया कि गवाहों पर दबाव बनाने और उन्हें प्रभावित किए जाने की आशंका को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जांच और निष्पक्ष सुनवाई को सही तरीके से पूरा कराने के लिए आरोपी का हिरासत में रहना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब आरोपी प्रमोद सिंह को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा, जिससे मामले में निष्पक्ष गवाही और स्पीडी ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।
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