असम की धरती से Hemant Soren की हुंकार: 'भाजपा राज में मजदूर बेहाल, झारखंड मॉडल ही अब एकमात्र विकल्प'
असम में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने चाय बागान मजदूरों की दुर्दशा, न्यूनतम मजदूरी और हजारीबाग हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ 'फूट डालो और राज करो' की राजनीति करती है, जबकि झारखंड में विकास जमीन पर दिख रहा है.

Assam Assembly Election 2026: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की स्थिति को "श्राप" करार दिया. उन्होंने कहा कि असम की पहचान इन मजदूरों के कंधों पर है, लेकिन डबल इंजन की सरकार ने उन्हें 250 रुपए की दिहाड़ी पर छोड़ दिया है. सोरेन ने संकल्प लिया कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो न्यूनतम मजदूरी को 250 रुपए से बढ़ाकर 500 किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सरकार ने मजदूरी नहीं बढ़ाई, तो 250 से ऊपर बिकने वाली चाय पर 50% 'मजदूरी सेस' लगाकर सीधे मजदूरों के खाते में भेजा जाएगा.

झारखंड का विकास बनाम असम की चुनौतियां
संबोधन के दौरान सोरेन ने झारखंड और असम के पुराने रिश्ते को याद किया. उन्होंने कहा कि असम आज भी मूलभूत सुविधाओं जैसे स्कूल, पक्का मकान और गैस के लिए संघर्ष कर रहा है. इसके विपरीत, झारखंड में उनकी सरकार महिलाओं को 2500 रुपए प्रति माह दे रही है और 60 वर्ष से ऊपर के हर व्यक्ति को पेंशन सुनिश्चित की गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या असम में बिजली, पानी और मकान मुफ्त मिल रहे हैं? उन्होंने वर्तमान सरकार को "सोई हुई सरकार" बताते हुए कहा कि चुनाव आते ही 9000 रुपए बांटना जनता के साथ मजाक है.
हजारीबाग हत्याकांड: भाजपा पर हेमंत सोरेन का पलटवार
झारखंड के हजारीबाग (विष्णुगढ़) में 12 साल की बच्ची की निर्मम हत्या का जिक्र करते हुए हेमंत सोरेन ने भाजपा को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि इस घटना पर भाजपा राज्य बंद करने का नाटक कर रही थी और जेएमएम पर कीचड़ उछाल रही थी, लेकिन जांच में हत्यारा खुद भाजपा का ही नेता निकला. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां लोग मिलजुलकर रहते हैं, वहां भाजपा की 'रोटी' नहीं पकती, इसीलिए वे समुदायों को आपस में लड़ाने का काम करते हैं.
'सिद्धू-कान्हू के अनुयायी पीठ दिखाकर नहीं भागते'
सोरेन ने खुद को सिद्धू-कान्हू और शिबू सोरेन का अनुयायी बताते हुए कहा कि वे गरीबों और मजदूरों की लड़ाई डटकर लड़ेंगे. उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसी सरकार चुनें जो उनके इशारों पर चले, न कि वह जो हिंदू-मुस्लिम और अगड़ा-पिछड़ा के नाम पर समाज को बांटे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महंगाई और बढ़ेगी, इसलिए अब वक्त आ गया है कि आदिवासी-मूलवासी अपनी ताकत पहचानें और इस जनविरोधी सरकार को उखाड़ फेंकें.
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