JPSC अध्यक्ष पद के लिए 70 करोड़ देने के आरोपों पर घिरी सरकार!, बाबूलाल मरांडी बोले- छात्रों से ध्यान भटकाने का रचा जा रहा नाटक
संसद से पारित हुए MMDR (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026 को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है।


Ranchi: संसद से पारित हुए MMDR (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026 को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिल का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और 'इंडी' गठबंधन के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार इस विधेयक के बहाने ओछी राजनीति कर रही है और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
'राज्यों का हक छीनने का आरोप बेबुनियाद, मिलेगा 90 फीसदी राजस्व'
बाबूलाल मरांडी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह तथ्यों के विपरीत है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना बिल्कुल नहीं है। रॉयल्टी, DMF, NMET, नीलामी प्रीमियम और GST में राज्यों की हिस्सेदारी पहले की तरह बनी रहेगी। खनन क्षेत्र से होने वाले कुल भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों के खाते में ही जाएगा।
उन्होंने बताया कि साल 2014-15 से 2024-25 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व लगभग 354 प्रतिशत बढ़कर 25,206 करोड़ से 1,14,549 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी जो 2014-15 में 60 प्रतिशत थी, वह 2024-25 में बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गई है। ऐसे में केंद्र पर राजस्व छीनने का आरोप लगाना सरासर गलत है।
'झारखंड की गलत खनिज नीति से घटा कोयला उत्पादन'
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड की असली समस्या केंद्र नहीं, बल्कि राज्य सरकार की खुद की गलत खनिज नीतियां हैं। हेमंत सरकार ने लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन का भारी-भरकम उपकर (Cess) लगा दिया है, जो छत्तीसगढ़ के 22.50 रुपये प्रति टन के मुकाबले करीब 27 गुना ज्यादा है। इसके अलावा कोयले पर भी महज 16 महीनों के भीतर Cess को 100 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति टन कर दिया गया। इसी वजह से BCCL का 2025-26 का उत्पादन घट गया है।
उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा ने पिछले कुछ सालों में 35 खदानें चालू करके करीब 87,000 करोड़ का नीलामी प्रीमियम कमाया, जबकि झारखंड सरकार पिछले 6 सालों में एक भी खदान चालू नहीं करवा पाई। बालू, पत्थर और छोटे खनिजों पर MMDR संशोधन का कोई प्रभाव नहीं है और इन पर राज्यों का नियंत्रण पहले की तरह ही रहेगा।
छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने का आरोप, JPSC अध्यक्ष पद पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केवल छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए इस विधेयक पर बेवजह का विवाद खड़ा कर रही है। युवा लगातार JPSC, JSSC और CGL में धांधली और नौकरियां बेचे जाने के खिलाफ 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। जब छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान किया, तब जाकर सरकार बातचीत के लिए जागी।
इसके साथ ही उन्होंने JPSC अध्यक्ष पद को लेकर भी सनसनीखेज सवाल उठाए। मरांडी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में एल. खियांग्ते द्वारा JPSC अध्यक्ष बनने के लिए कथित तौर पर 70 करोड़ रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। सरकार को इस गंभीर आरोप पर तुरंत स्थिति साफ करनी चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। प्रेसवार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा भी मौजूद रहे।

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