'पहले बोरिंग कराओ, फिर खुलेगी खदान!, शिकारीपाड़ा के सालबोना में जनसुनवाई के बाद भी ग्रामीणों का हंगामा
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सालबोना मौजा में प्रस्तावित पत्थर खदान को चालू कराने के लिए अपर समाहर्ता (AC) की अध्यक्षता में ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई आयोजित की गई।

Dumka: दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सालबोना मौजा में प्रस्तावित पत्थर खदान को चालू कराने के लिए अपर समाहर्ता (AC) की अध्यक्षता में ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई आयोजित की गई। लगातार 5 बार जनसुनवाई बेनतीजा रहने के बाद आखिरकार इस छठी जनसुनवाई में खदान चालू करने पर सहमति बन गई। हालांकि, सहमति के बाद भी स्थानीय आदिम जनजाति पहाड़िया ग्रामीणों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और वे अपनी मूलभूत सुविधाओं की शर्त पर अब भी कायम हैं।
'करोड़ों की कमाई, पर पीने के पानी को मोहताज'
सालबोना गांव के आदिम जनजाति पहाड़िया ग्रामीणों का कहना है कि पत्थर कारोबारी उनकी जमीनों का अधिग्रहण कर करोड़ों रुपये की कमाई करते हैं, लेकिन स्थानीय लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों ने ग्रामसभा के दौरान स्पष्ट शर्त रखी थी कि खदान शुरू करने से पहले गांव में पीने के पानी के लिए गहराई से बोरिंग कराई जाए। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई, पक्की सड़क, निर्बाध बिजली और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था बहाल की जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इन बुनियादी शर्तों को नजरअंदाज कर किसी भी तरह खदान खुलवाने के लिए उतावला दिखता है, जिसमें शिकारीपाड़ा अंचल के CO की भूमिका प्रमुख रही है।
सहमति मिलने के बावजूद जारी रहेगा विरोध
हालांकि जनसुनवाई में प्रशासनिक स्तर पर खदान चालू करने की सहमति दर्ज कर ली गई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग, 'पहले बोरिंग कर पानी की सुविधा दी जाए' इसको अनदेखा किया गया है।
सीधे-सादे पहाड़िया आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीनों का इस्तेमाल कर उनकी अपनी ही जरूरतों को दरकिनार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे और अपनी जायज मांगों को लेकर उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा।

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