न छाता, न कोई टेंट, बस न्याय की आस... बारिश भी नहीं डिगा सकी अनशनकारी छात्रों का इरादा, सरकार पर टिकी निगाहें
आंदोलन में न तो कोई VIP टेंट लगा है, न एसी है और न ही सिर छुपाने के लिए कोई छाता है। यहां कोई आराम नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है

RANCHI/JHARKHAND: राजधानी रांची की सड़कों पर आसमान से लगातार पानी बरस रहा है, लेकिन इस बारिश से कहीं ज्यादा भारी उन छात्रों की आंखों में पल रहे सपने हैं, जो नौकरी और न्याय की आस में अनशन पर डटे हुए हैं। शरीर पूरी तरह से भीग चुका है, ठंड लग रही है, लेकिन उनके इरादे टस से मस नहीं हुए हैं। यह तस्वीर अब सिर्फ एक आंदोलन की नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे झारखंड के युवाओं के गुस्से, उनके संघर्ष और उनकी उम्मीदों का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। बारिश की तेज बूंदें भी अनशनकारी छात्रों के हौसले की तपिश को बुझा नहीं पा रही हैं।
न छाता, न VIP इंतजाम... सिर्फ जिद और किताबें
इस आंदोलन में न तो कोई VIP टेंट लगा है, न एसी है और न ही सिर छुपाने के लिए कोई छाता है। यहां कोई आराम नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है, युवाओं के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए। बारिश की हर एक बूंद के साथ इन छात्रों का संघर्ष और भी गहरा होता जा रहा है। ये वही युवा हैं, जिनका साफ कहना है कि उनकी यह लड़ाई किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं है। वे अपनी मेहनत, अपने हक और अपने सुरक्षित भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। अनशन स्थल का नजारा रुला देने वाला है; किसी के हाथ में भीगती हुई किताब है, तो कोई भूख से तड़पते हुए भी पूरी ताकत के साथ नारे बुलंद कर रहा है। यह आंदोलन सुविधाओं का नहीं, बल्कि एक कड़े संकल्प का है।
सरकार के पाले में गेंद, क्या लिया जाएगा बड़ा फैसला?
अनशन स्थल पर बारिश में भीगते ये छात्र अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गए हैं। उनकी बस एक ही उम्मीद है कि उनकी यह कांपती लेकिन बुलंद आवाज सत्ता के गलियारों तक जरूर पहुंचे। अब सबसे बड़ा सवाल राज्य सरकार के सामने खड़ा है। लोगों के मन में यही सवाल है कि क्या सरकार इन छात्रों की जायज मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला लेगी, या फिर बारिश के बीच सुलग रही यह आग कोई और बड़ा रूप ले लेगी? सच तो यह है कि रांची की सड़कों से उठी यह आवाज अब धीरे-धीरे पूरे झारखंड में गूंजने लगी है और अब हर किसी की निगाहें सिर्फ और सिर्फ सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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