'बिना प्रश्न पत्र हो रही परीक्षा, स्कूल में शिक्षक नदारद!', 7 KM पैदल चलकर DC दफ्तर पहुंचे 10वीं के छात्र
साहिबगंज में 10वीं के छात्रों ने बिना प्रश्न पत्र परीक्षा और शिक्षकों की कमी के खिलाफ 7 किमी पैदल चलकर डीसी कार्यालय में शिकायत की। डीईओ ने प्राचार्य को फटकार लगाई।

Sahibganj: साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित उच्च विद्यालय, सौती चौकी पांगड़ो में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और भारी अव्यवस्था के खिलाफ कक्षा 10वीं के छात्र-छात्राओं ने मोर्चा खोल दिया। स्कूल प्रशासन की मनमानी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से त्रस्त होकर सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी कॉपी-किताबें हाथों में लिए करीब 7 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर सीधे जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंच गए। भारी संख्या में पहुंचे स्कूली बच्चों को समाहरणालय परिसर में नारेबाजी करते देख प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए।
प्रोजेक्टर पर प्रश्न दिखाकर ली जा रही थी परीक्षा
उपायुक्त कार्यालय में मौजूद जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) सह प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) उर्मिला हांसदा ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। छात्रों ने जो खुलासे किए, उन्हें सुनकर अधिकारी दंग रह गए। छात्रों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि स्कूल में कक्षा 10वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा बिना किसी छपे हुए प्रश्न पत्र के ही आयोजित की जा रही है। स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को प्रश्न पत्र देने के बजाय प्रोजेक्टर पर सवाल दिखाए जा रहे हैं और सीधे कॉपियों में उत्तर लिखने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। पूरे विद्यालय में केवल सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी विषय के शिक्षक उपलब्ध हैं, जबकि गणित, विज्ञान, हिंदी, संस्कृत और उर्दू जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक न होने से उनका सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है।
प्रभारी डीईओ ने प्राचार्य को लगाई फटकार
छात्रों की गंभीर शिकायतें सुनने के बाद प्रभारी डीईओ उर्मिला हांसदा ने मौके पर ही विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य को तलब किया और परीक्षा संचालन में बरती जा रही गंभीर लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी छात्रों को विधिवत प्रश्न पत्र उपलब्ध कराकर नियमानुसार परीक्षा ली जाए। साथ ही बच्चों को आश्वस्त किया गया कि स्कूल में विषयवार शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा।
बीच रास्ते कोई अनहोनी होती तो जिम्मेदार कौन?
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में शिक्षा विभाग की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर सामने आई है कि परीक्षा का बहिष्कार कर दर्जनों नाबालिग छात्र-छात्राएं मुख्य मार्ग से होकर 7 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यदि इस दौरान राजमार्ग पर कोई अप्रिय सड़क दुर्घटना घट जाती, तो इसका उत्तरदायी कौन होता? अब देखना यह है कि इस गंभीर प्रशासनिक विफलता और लापरवाही को लेकर जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
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