नालंदा सदर अस्पताल में बवाल के बाद इमरजेंसी बहाल, OPD पर अब भी ताला!
नालंदा सदर अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद हुए हंगामे के बाद प्रशासन और डॉक्टरों के बीच वार्ता से इमरजेंसी सेवा बहाल हो गई है। हालांकि पुलिस पिकेट सक्रिय होने तक डॉक्टरों ने OPD बंद रखने का फैसला किया है।


बिहारशरीफ: नालंदा सदर अस्पताल में तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद हुए हंगामे, तोड़फोड़ और डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित मारपीट के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप से इमरजेंसी सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि, सुरक्षा को लेकर डॉक्टरों ने अभी भी सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल परिसर में पुलिस पिकेट विधिवत रूप से सक्रिय नहीं हो जाती, तब तक OPD सेवाएं बंद रहेंगी।
प्रशासन और डॉक्टरों के बीच हुई बैठक
मामले को लेकर सदर एसडीओ किसलय श्रीवास्तव और अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवा दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी। प्रशासन की ओर से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद इमरजेंसी में चिकित्सा सेवाएं शुरू कर दी गईं।
सदर SDO किसलय श्रीवास्तव के मुताबिक, तीन वर्षीय बच्चा पिछले करीब पांच दिनों से बीमार था और परिजन उसका स्थानीय स्तर पर इलाज करा रहे थे। बच्चे कोसीवियर गैस्ट्रोएंटराइटिस विथ डायरिया की शिकायत थी। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी और वह गैस्पिंग स्टेज में था। मेडिकल टीम ने तत्काल बच्चे को देखा और आईवी फ्लूड देने के लिए हीट यूनिट भेजा। SDO के अनुसार, अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण बच्चे की नसें सिकुड़ चुकी थीं। नर्सों द्वारा आईवी फ्लूड देने की कोशिश के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई।
मौत के बाद अस्पताल में मचा था बवाल
बच्चे की मौत के बाद परिजनों और उनके साथ आए लोगों पर अस्पताल में हंगामा करने, नर्सों के साथ बदसलूकी और मारपीट करने का आरोप लगा। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के मुताबिक, कुछ उपद्रवी इमरजेंसी वार्ड में घुस गए और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों पर भी हमला किया। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षा गार्डों के घायल होने की बात सामने आई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हंगामे के कारण सर्पदंश समेत अन्य गंभीर मरीजों को भी समय पर इलाज उपलब्ध कराने में परेशानी हुई।
पुलिस पिकेट की मांग पर अड़े डॉक्टर
घटना के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अस्पताल परिसर में स्थायी पुलिस पिकेट की मांग की थी। इसके अलावा हमले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी गई। प्रशासन के साथ बातचीत के दौरान मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवा शुरू कर दी।
OPD कब खुलेगा?
इमरजेंसी सेवा शुरू होने से गंभीर मरीजों को राहत मिली है, लेकिन OPD को लेकर स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस पिकेट के सक्रिय होने तक OPD सेवाएं स्थगित रहेंगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था कब तक लागू होती है और डॉक्टरों का भरोसा बहाल होने के बाद OPD सेवा कब पूरी तरह सामान्य होगी।
(नालंदा से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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