क्या आपको भी है ओवरथिंकिंग की परेशानी? इन 5 आसान तरीकों से हो सकता है निबटारा
किसी छोटी सी बात पर भी बार-बार सोचने की आदत अगर लगातार बनी रहती है, तो यह गंभीर समस्या के रूप में उभरकर सामने आ सकती है. इसलिए इसका समय रहते समाधान बेहद आवश्यक है. हम यहां इसे कम करने के लिए 5 पांच तरीके बता रहे हैं.

Overthinking Issue: ओवरथिंकिंग यानी अधिक सोचने की आदत. जब हम दिमाग में एक ही बात बार-बार धुमाते हैं. जब किसी बात पर हम जोर देकर लगातार एक ही बात सोचते रहते हैं कि ये क्यों हुआ, क्या मुझसे कोई गलती हुई, मैंने सही रिएक्ट किया या नहीं, उसने ऐसा क्यों कहा इत्यादि. ऐसे कई सारे सवाल हैं जो जहन में लगातार घूमते रहते हैं.
कैसे पहचाने की आप ओवरथिंक कर रहें?
- बार-बार विचार करना या एक ही स्थिति के बारे में लगातार सोचते रहना.
- मानसिक थकान- बिना शारीरिक काम के भी दिमाग थका हुआ महसूस होना.
- चिड़चिड़ापन- छोटी-छोटी बातों से परेशान होना.
- खुद पर संदेह करना- अपने निर्णयों पर बार-बार शक करना
- बहुत ज्यादा औवरथिंकिंग से कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएं जैसे- स्ट्रेस, एंजाइटी, डिप्रेशन, अनिद्रा, इम्यून सिस्टम कमजोर होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
ओवरथिंकिंग को कैसै कम किया जाए
1) रोज व्यायाम करें
जब भी हम व्यायाम करते है तो हमारे मस्तिष्क में एंडोर्फिन और डोपामाइन रिलीज होता हैं. आप इस वजह से अच्छा महसूस करते है.इसके वजह से स्ट्रेस लेवल कम होता है और फोकस बढ़ता है.
है.
2) सात्विक भोजन
सात्विक भोजन जैसे ताजे फल, सब्जियां, दाल, दूध, घी, नट्स, शहद को अपने आहार में शामिल करे. सात्विक भोजन लेने से नींद अच्छी आती है. इससे ओवरथिंकिंग कम करने में मदद मिलती है.
3) खुद को कामो में रखें व्यस्त
जब हमारा दिमाग कोई सकारात्मक काम करने में लग जाता है तो ओवरथिंकिंग नहीं होती है. काम खत्म होने पर आपको संतुष्टि महसूस होती है. इस वजह से अच्छी नींद आती है.
4) सकारात्मक लोगों से बात करें
सकारात्मक लोगों से बात करना शुरु कर दें. सकारात्मक लोगों से मतलब ऐसे लोगों से है जिनके साथ रहकर मन अच्छा रहता है, जिनसे आप खुलकर अपने मन की बातें कर सकते हैं. एसे लोगों से बात कर के आप हल्का महसूस करेंगें.
5) प्राणायाम और ध्यान
प्राणायाम और ध्यान करने से स्ट्रेस लेवल कम होता है. ऐसा करने से संपूर्ण मानसिक स्थिति बेहतर होती है.
ओवरथिंकिंग की आदत यूं तो एक आम सी बात लगती है, लेकिन इसे समय रहते कम नहीं किया गया तो यह बड़ी परेशानी का रूप ले सकती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह डिप्रेशन जैसी परेशानी का पहला फेज होता है. अगर लंबे समय तक ओवरथिंकिंग और स्ट्रेस वाली परिस्थिति में आप रहते हैं, तो आपको ऊपर दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना चाहिए. इसके बावजूद अगर ठीक न हो तो मनोचिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए.
(आर्टिकल लिखने का श्रेय : पल्लवी)
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