जर्जर झोपड़ी, टपकती छत और 8 सदस्यों का परिवार..., गिरिडीह में सरकारी आवास योजनाओं की खुली पोल!
केंद्र सरकार की 'PM आवास योजना' हो या झारखंड सरकार की 'अबुआ आवास योजना', बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

Giridih: केंद्र सरकार की 'PM आवास योजना' हो या झारखंड सरकार की 'अबुआ आवास योजना', बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गिरिडीह जिले की बदहाली का एक दर्दनाक नज़ारा तिसरी प्रखंड के बहराबांक गांव में देखने को मिला है, जहां एक जरूरतमंद परिवार आज भी सिर छिपाने के लिए एक अदद पक्के मकान को तरस रहा है। सिस्टम की अनदेखी का आलम यह है कि आठ सदस्यों का यह परिवार एक बेहद जर्जर और खस्ताहाल झोपड़ी में जिंदगी काटने को मजबूर है।
टपकती छत के नीचे 8 जिंदगियां, दिव्यांग पति और गरीबी का बोझ
बहराबांक गांव की रहने वाली सहाना खातून की कहानी किसी का भी दिल दहला सकती है। उनके परिवार में कुल आठ सदस्य हैं, जो महज एक कमरे की कच्ची झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। गरीबी की मार झेल रहे इस परिवार की स्थिति तब और दयनीय हो जाती है जब बारिश का मौसम आता है। बारिश में झोपड़ी की छत से लगातार पानी टपकता है और इसी टपकते पानी के बीच पूरा परिवार रातें गुजारता है। सहाना खातून के पति एक पैर से दिव्यांग हैं और मामूली रूप से छाता बनाकर परिवार का पेट पालने की कोशिश करते हैं। पति की शारीरिक लाचारी के कारण पूरे परिवार के पालन-पोषण और घर चलाने की जिम्मेदारी सहाना खातून के कंधों पर आ टिकी है।
अधिकारियों और मुखिया के चक्कर काटकर थकी सहाना
सहाना खातून का कहना है कि उनकी बेबसी और गरीबी गांव में किसी से छिपी नहीं है। अपने परिवार को एक सुरक्षित छत दिलाने के लिए वह कई बार स्थानीय मुखिया के पास गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने पीएम आवास योजना या अबुआ आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए कई बार हाथ जोड़े, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला और आज तक कोई मदद नहीं पहुंच सकी।
मुखिया की दलील, 'आवेदन मिलता तो करते पहल'
दूसरी तरफ, जब इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत के मुखिया राजकुमार दयाल से सवाल किया गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। मुखिया दयाल का कहना है कि अगर सहाना खातून आवास योजना की पात्रता रखती हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से पीएम आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि सहाना खातून की तरफ से अभी तक उन्हें कोई औपचारिक आवेदन नहीं मिला है। मुखिया के मुताबिक, आवेदन न मिलने के कारण उन्हें मामले की जानकारी नहीं हो सकी, वरना वे आवास योजना दिलाने के लिए आगे पहल जरूर करते।

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