झारखंड के 'सोनम वांगचुक' बने देवेंद्र नाथ महतो! 11 दिनों से सत्याग्रह, बोले- 'न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन'
JPSC-JSSC में कथित धांधली के खिलाफ छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का सत्याग्रह और भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। समर्थक उन्हें झारखंड का 'सोनम वांगचुक' बता रहे हैं।


RANCHI: झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और धांधली के खिलाफ चल रहा युवाओं का आंदोलन अब बेहद नाजुक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर सत्याग्रह पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रही। बिना अन्न और जल के लगातार धरने पर बैठने के कारण देवेंद्र की सेहत काफी बिगड़ गई है।
ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल गिरा, चढ़ाया गया स्लाइन
भूख हड़ताल के तीसरे दिन देवेंद्र नाथ महतो का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक गिर गया है। उन्हें शरीर में तेज दर्द, कमजोरी, अत्यधिक थकान और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो रही हैं। आंदोलन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें स्लाइन (Saline) चढ़ाया है।
इसके बावजूद आंदोलन स्थल पर युवाओं, अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है। समर्थक अपने नेता के हौसले की तुलना करते हुए अब उन्हें झारखंड का 'सोनम वांगचुक' बता रहे हैं और उनका खुलकर साथ दे रहे हैं।
"शिबू सोरेन की राह पर लड़ेंगे हक की लड़ाई"
अपनी बिगड़ती तबीयत के बीच भी देवेंद्र नाथ महतो के तेवर कड़े बने हुए हैं। उन्होंने ऐलान किया कि वे दिशुम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और आंदोलनों की राह पर चलते हुए झारखंड के युवाओं को न्याय दिलाने की यह लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे।
लाखों बेरोजगारों के सम्मान की जंग
देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट कहा कि जब तक राज्य सरकार उनकी जायज मांगों पर संज्ञान लेते हुए JPSC और JSSC की कथित धांधली की निष्पक्ष जांच नहीं कराती, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल की नहीं है, बल्कि राज्य के उन लाखों बेरोजगार युवाओं और उनके माता-पिता के सम्मान की लड़ाई है जो सालों से एक उम्मीद में बैठे हैं।"
छात्र नेता ने सरकार से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करने और परीक्षाओं को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त बनाकर साफ-सुथरी व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कसम खाई है कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, यह सत्याग्रह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।

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