नगर निगम की बैठक में फूटा पार्षदों का गुस्सा! '4 साल बाद भी सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट नहीं', आंदोलन की चेतावनी
नगर निगम की मासिक बैठक में पार्षदों ने सड़क, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी जैसी समस्याओं को लेकर अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए। कई पार्षदों ने चेतावनी दी कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन और घेराव करेंगे।


मोतिहारी नगर निगम की मासिक बैठक इस बार विकास योजनाओं की समीक्षा से ज्यादा जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के लिए चर्चा में रही। विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने बैठक के दौरान अधिकारियों के सामने बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के गठन के चार साल बाद भी शहर के कई इलाकों में सड़क, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। बैठक में पार्षदों ने कहा कि हर महीने होने वाली बैठकों में वही मुद्दे दोहराए जाते हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता है। उनका कहना था कि विकास योजनाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखता। इससे जनता का गुस्सा अब जनप्रतिनिधियों पर निकल रहा है।
सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट के मुद्दे छाए रहे
बैठक में बिजली के पोल लगाने, खराब बिजली व्यवस्था को सुधारने, जर्जर सड़कों की मरम्मत, जलजमाव की स्थायी निकासी, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू करने और पेयजल संकट को हल करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। पार्षदों का कहना था कि इन समस्याओं के चलते लोगों को रोजाना काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड पार्षद रेणु ठाकुर ने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता ने उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, लेकिन जब अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते, तो आंदोलन ही आखिरी विकल्प रह जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर निगम का घेराव किया जाएगा।
वार्ड पार्षद मुकुल श्रीवास्तव ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर बैठक में समस्याएं उठाई जाती हैं, लेकिन उनके समाधान की कोई कोशिश नहीं होती। अगर विकास कार्यों में तेजी नहीं लाई गई, तो पार्षद को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
नगर आयुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा
बैठक में मौजूद अन्य पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को साझा करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद कई वार्डों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उनका कहना था कि विकास कार्यों की धीमी गति से लोगों का नगर निगम पर भरोसा कम होता जा रहा है। इन आरोपों पर नगर आयुक्त आशीष कुमार ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अधिकारियों और पार्षदों के बीच समन्वय से लंबित समस्याओं का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा और विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि यदि नगर निगम की सर्वोच्च बैठक में बार-बार उठाए जा रहे मुद्दों पर भी समय पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कब होगा। पार्षदों की नाराजगी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
(मोतिहारी से प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)

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