बीमा कंपनी की मनमानी पर कंज्यूमर कोर्ट का चाबुक, अब मृतक किसान की पत्नी को देने होंगे ₹6.50 लाख
पति की मौत के बाद उनकी पत्नी मादुई गगराई ने नियमानुसार बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। लेकिन कंपनी ने दो साल से अधिक समय तक न तो क्लेम पास किया और न ही इसे खारिज किया। दूसरी तरफ, बैंक की ओर से लोन चुकाने का दबाव लगातार बढ़ता गया


CHAIBASA/JHARKHAND: बीमा क्लेम का समय पर निपटारा न करना और उपभोक्ता को बेवजह परेशान करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया है। पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में गंभीर कमी का दोषी पाया है। आयोग ने मृतक किसान की विधवा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को 6.50 लाख रुपये का भुगतान करने का कड़ा आदेश जारी किया है। इसके लिए 45 दिनों की मोहलत दी गई है। अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला चक्रधरपुर प्रखंड के कोलचक्रा गांव से जुड़ा है। गांव के निवासी रेंगो गगराई ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक की चाईबासा शाखा से ऋण लिया था। लोन के साथ ही उन्होंने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की 'लोन सिक्योर इंश्योरेंस पॉलिसी' भी ली थी। 14 मार्च 2023 को अचानक कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण रेंगो गगराई का निधन हो गया।
बैंक के दबाव में कर्ज लेकर चुकाई किस्त
पति की मौत के बाद उनकी पत्नी मादुई गगराई ने नियमानुसार बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। लेकिन कंपनी ने दो साल से अधिक समय तक न तो क्लेम पास किया और न ही इसे खारिज किया। दूसरी तरफ, बैंक की ओर से लोन चुकाने का दबाव लगातार बढ़ता गया। बेबस महिला को अपनी ओर से कर्ज लेकर दो लाख रुपये बैंक में जमा करने पड़े। इसके बावजूद बीमा राशि का भुगतान नहीं हुआ, जिसके बाद तंग आकर महिला ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत में कंपनी के बहानों की खुली पोल
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दलील दी कि जरूरी कागजात न मिलने की वजह से भुगतान अटका रहा। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और महिला सदस्य देवश्री चौधरी की पीठ ने कंपनी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दो साल से ज्यादा समय तक मामला लटकाने के पीछे कंपनी कोई ठोस वजह नहीं बता सकी। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता के अधिकारों का हनन और सेवा में गंभीर लापरवाही है।

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