अति नक्सल प्रभावित इलाकों में कंप्यूटर शिक्षा ठप ! मरम्मत के इंतजार में फांक रहे धूल, बच्चों के भविष्य पर सवाल
लोहरदगा के नक्सल प्रभावित ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों को मिले कंप्यूटर वर्षों से खराब पड़े हैं. बिजली, मेंटेनेंस और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे डिजिटल शिक्षा से वंचित हैं. विभाग मरम्मत की बात कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं, जिससे ग्रामीण-शहरी शिक्षा अंतर बढ़ रहा है.

JHARKHAND (LOHARDAGA): लोहरदगा जिला के अतिनक्सल प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों को वर्षों पहले डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की मंशा से दिए गए कंप्यूटर आज खुद बदहाली का शिकार हैं. अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर खराब पड़े हैं, कहीं बिजली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है तो कहीं प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव है. परिणामस्वरूप, डिजिटल युग में गांव के बच्चे कंप्यूटर शिक्षा से वंचित रह गए हैं.

जानकारी के अनुसार जिले के सुदूरवर्ती और नक्सल प्रभावित प्रखंडों में पेशरार, सेन्हा और कुडू के कई विद्यालयों में कंप्यूटर, तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं या फिर वर्षों से मरम्मत के इंतजार में धूल फांक रहे हैं. स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि समय-समय पर विभाग को सूचना देने के बावजूद न तो मरम्मत कराई गई और न ही नए कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए.
राजकीय मध्य विद्यालय रोरद पेशरार के शिक्षक तनु प्रसाद साहु ने बताया कि स्कूल के खराब पड़े कंप्यूटर की जानकारी विभाग को दी गई है विभाग की तरफ से भी कंप्यूटर बनाने की बात कही गई है लेकिन अबतक कोई मैकेनिक नहीं आया है. कंप्यूटर का बहुत बड़ा उपयोगी है लेकिन बिजली सबसे बड़ी समस्या है. एक दिन बिजली कटती है तो 15 दिन, एक महीने या डेढ़ महीन तक गायब रहती है.

स्कूल में कंप्यूटर की इस स्थिति को लेकर ग्रामीण अभिभावकों में भी गहरी चिंता है. उनका कहना है कि आज के दौर में कंप्यूटर ज्ञान किसी भी बच्चे के भविष्य के लिए जरूरी है. शहरों के बच्चे जहां ऑनलाइन पढ़ाई, कोडिंग और डिजिटल संसाधनों से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चे बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा से भी दूर हैं. इससे शहरी और ग्रामीण शिक्षा के बीच की खाई और गहरी हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत करना ही नक्सल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है. लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी इस लक्ष्य में बाधा बन रही है. वहीं, इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खराब कंप्यूटरों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही मरम्मत एवं प्रतिस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक नक्सल प्रभावित ग्रामीण इलाकों के बच्चों का भविष्य अधर में ही रहेगा.
रिपोर्ट- अमित वर्मा
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