'सरकारी से ज्यादा तो CM की अपनी खदानें', MMDR संशोधन कानून पर सुदेश महतो का हेमंत सरकार पर हमला
MMDR संशोधन कानून पर सुदेश महतो ने हेमंत सरकार पर हमला बोला। उन्होंने खनिज राजस्व के इस्तेमाल, निजी खदानों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर सवाल उठाए।

Bokaro: झारखंड में केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (MMDR) संशोधन कानून को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। बोकारो परिसदन में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो ने हेमंत सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने खनिज संपदा से मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जो पैसा खनन प्रभावित इलाकों की तस्वीर बदलने और वहां के विस्थापितों के विकास पर खर्च होना चाहिए था, उसे सरकार ने अपने राजनीतिक और चुनावी लाभ के लिए पानी की तरह बहा दिया।
सड़क, शिक्षा और रोजगार पर खर्च हो रॉयल्टी का पैसा
आजसू प्रमुख ने दो टूक कहा कि जिस इलाके की जमीन से कीमती खनिज संपदा निकाली जाती है, वहां के स्थानीय लोगों का उस पर पहला हक बनता है। खनन राजस्व का इस्तेमाल उन पिछड़े इलाकों में बेहतरीन सड़कें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार के साधन खड़े करने में किया जाना चाहिए था, लेकिन हेमंत सरकार ने इन बुनियादी प्राथमिकताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।
'सरकारी से ज्यादा सीएम की अपनी खदानें', MMDR विरोध के पीछे बताया निजी स्वार्थ
MMDR संशोधन कानून को लेकर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) द्वारा किए जा रहे विरोध पर सुदेश महतो ने बड़ा सियासी विस्फोट किया। उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में आज सरकारी खनन क्षेत्रों से कहीं ज्यादा हेमंत सोरेन और उनके करीबियों के निजी माइनिंग क्षेत्र संचालित हो रहे हैं। केंद्र के नए संशोधन से इन निजी खदानों और अवैध सिंडिकेट पर सीधा असर पड़ने वाला है, इसलिए अपनी निजी खदानों को बचाने के डर से झामुमो इस कानून का बेबुनियाद विरोध कर रहा है।
'अगर राज्य का नुकसान है तो केंद्र से करें बात', सियासत गरमाने के संकेत
सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नसीहत देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार को वाकई ऐसा लगता है कि इस नए कानून से झारखंड के आर्थिक और संवैधानिक हितों को कोई नुकसान पहुंच रहा है, तो राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय सीधे केंद्र सरकार के साथ टेबल पर बैठकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि खनन की पाई-पाई सिर्फ और सिर्फ प्रभावित जनता के विकास में लगनी चाहिए। आजसू सुप्रीमो के इस तीखे बयान के बाद राज्य में पक्ष और विपक्ष के बीच खनिज रॉयल्टी और माइनिंग को लेकर राजनीतिक जंग और तेज होना तय है।
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