Hemant Soren Exclusive on Naxatra News: असम विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने दृढ़ता से कदम रख दिए हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री खुद प्रमुखता से असम की जनता के से रूबरू हो रहे हैं. इसी कड़ी में चुनाव कार्यक्रमों और जेएमएम की रणनीतियों को लेकर सीएम ने असम के डिब्रूगढ़ में नक्षत्र न्यूज से खास बातचीत की.
सीएम ने चुनावी रणनीतियों पर बातचीत करते हुए कहा कि जेएमएम यह चुनाव सत्ता प्राप्त करने की खातिर नहीं लड़ रही. बल्कि यह लड़ाई आदिवासियों के हक के लिए लड़ी जा रही है. उन्होंने कहा कि असम की वर्तमान सरकार द्वारा आदिवासियों को भूमि पट्टा देने के नाम पर ठगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि यहां के आदिवासियों को ओबीसी का दर्जा दिया हुआ है, ऐसे में उन्हें आदिवासी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता.

फ्री-बीज (Freebies) का जिक्र करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने असम सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नौ हजार महिलाओं के बैंक खाते में देने के बहाने पोलराइजेशन का काम किया जा रहा है. उन्होंने आगे इसी मुद्दे पर ललकारते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो हर महीने महिलाओं के खाते में इतने ही पैसे देकर दिखाएं.
उन्होंने महिलाओं के रोजगार बढ़ोत्तरी को लेकर जेएमएम की योजनाओं की चर्चा की. कहा कि-
हमारे पास ऐसी योजनाएं हैं जिससे हर माह उन्हें नौ हजार रुपए निश्चित ही मिलेंगे. ये रकम सरकार द्वारा दिए जाएंगे, या चाय बागान द्वारा मिलेंगे, इसकी चिंता करने की कतई आवश्यकता नहीं है.
जहां भी आदिवासी पीड़ित हैं, हम उनके लिए हैं संघर्षरत
सीएम ने आदिवासी जनजातियों को संबोधित करते हुए कहा कि जहां भी आदिवासी संघर्ष की स्थिति में हैं, या उन्हें सताया जा रहा है, दबाया जा रहा है. उनके लिए जेएमएम हमेशा लड़ाई लड़ने को तैयार है.
'गुरु जी' ने लड़ी थी आदिवासियों के उत्थान के लिए लड़ाई
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि असम के चाय बागान के आदिवासियों के लिए गुरु जी ने लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने कहा कि
आज वे जीवित नहीं हैं, लेकिन उन्हीं के कदमों पर चलते हुए असम आया हूं.
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाया. टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय चुनाव आयोग भी बीजेपी के इशारे पर ही काम कर रही है. वहीं असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंता बिश्व सरमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि
"जिस प्रकार वे हिंदू-मुस्लिम करते हैं, ये किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता. लेकिन BJP का जन्म ही हिंदू-मुस्लिम पॉलिटिक्स के साथ हुआ है."
हेमंत सोरेन ने पार्टी के मनोबल को उठाते हुए और बीजेपी की सक्रियता का आकलन करते हुए कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के असम चुनाव लड़ने से काफी खौफ पनप चुका है. इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री को भी डिब्रूगढ़ के चाय बागानों में घूमना पड़ रहा है. तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि "एक बार चुनाव खत्म हो जाए, ये लोग फिर ताली और थाली पिटवाने लग जाएंगे".
रिपोर्ट: नवीन शर्मा









