झारखंड विधानसभा में हंगामा: प्रदीप यादव और इरफान अंसारी के बीच जुबानी भिड़ंत, अध्यक्ष भी हुए उत्तेजित
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बीच तीखा विवाद हो गया. थैलेसीमिया, सिकल सेल और हंसडीहा अस्पताल चोरी मामले पर उठे सवालों से शुरू हुई बहस इतनी बढ़ी कि विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा.

JHARKHAND (RANCHI): झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बीच जोरदार बहस का गवाह बना. प्रदीप यादव ने थैलेसीमिया, सिकल सेल और एनीमिया पीड़ितों के मुफ्त इलाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार के पास पूरा सर्वे होने के बावजूद मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल रहा. मंत्री इरफान अंसारी के जवाब से प्रदीप यादव संतुष्ट नहीं हुए. इसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते बढ़ती चली गई.
अध्यक्ष हुए नाराज, दोनों नेताओं को लगाई फटकार
विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष खुद उत्तेजित हो उठे. उन्होंने दोनों विधायकों को फटकार लगाते हुए कहा कि “मंत्री आपके हिसाब से जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं.” अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद भी माहौल कुछ देर तक तनावपूर्ण बना रहा. वहीं विधायक दीपिका पांडे ने भी प्रदीप यादव को शांत रहने और सम्मानपूर्वक बोलने की नसीहत दी.
हंसडीहा अस्पताल चोरी मामला बना विवाद की जड़
प्रदीप यादव ने सदन में फिर से हंसडीहा के मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में हुई करोड़ों की चोरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. वहीं स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पलटवार करते हुए कहा - “या तो साबित करें, या माफी मांगें. बिना तथ्य के बातें नहीं चलेंगी.” मंत्री ने बताया कि लगभग एक करोड़ रुपये की सामग्री की चोरी हुई है.
चोरी की जांच में पुलिस ने तेज की कार्रवाई
चोरी की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और तकनीकी टीम को मौके पर भेजा. सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है. घटनास्थल से मिले साक्ष्य को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.
300 करोड़ की लागत से बना था अत्याधुनिक अस्पताल
हंसडीहा का यह 100 बेड वाला मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल संथाल परगना का सबसे आधुनिक स्वास्थ्य संस्थान माना जाता था. यहां ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम, आधुनिक OT, ICU और आपातकालीन सेवाओं के लिए बेहतरीन व्यवस्था की गई थी. कोरोना काल में ECL की ओर से 200 अतिरिक्त बेड और ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा भी दी गई थी.
बिजली बिल बकाया और सुरक्षा में लापरवाही
अस्पताल पर 19.52 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था, जिसके कारण मार्च 2024 में अस्थायी रूप से बिजली काटी गई थी.
अक्टूबर 2025 में स्थायी रूप से कनेक्शन काटने पहुंची टीम को पता चला कि अस्पताल परिसर से ट्रांसफॉर्मर का कवाल चोरी हो चुका है.
उस समय पुलिस ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था, जिसके बाद अब यह बड़ी चोरी सामने आई है.
इस पूरे मामले ने सदन में भारी हंगामा मचा दिया, और प्रश्न उठाया कि इतने महंगे और महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा में आखिर चूक कहाँ हुई.
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