झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
राज्य सरकार द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के आदेश के बाद अब न्यायिक सेवा से जुड़ी भर्ती पर भी कानूनी विवाद गहरा गया है।


Jharkhand High Court: राज्य सरकार द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के आदेश के बाद अब न्यायिक सेवा से जुड़ी भर्ती पर भी कानूनी विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा को रद्द किए जाने के निर्णय को झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
दर्जन भर प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका
सरकारी फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित राहुल सिंह और श्वेताभ पांडेय समेत करीब एक दर्जन अभ्यर्थियों ने मिलकर झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष गुहार लगाई है कि सिविल जज नियुक्ति परीक्षा को रद्द करने का राज्य सरकार का आदेश अनुचित और विधि विरुद्ध है, इसलिए सरकार के इस फैसले को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में जल्द सुनवाई का किया जाएगा आग्रह
याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर यह मामला सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जस्टिस दीपक रौशन की एकल पीठ में सूचीबद्ध हो सकता है। अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस मामले की गंभीरता और अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए अदालत से इस पर त्वरित और अतिशीघ्र सुनवाई करने का विशेष आग्रह करेंगे।
परीक्षा रद्द होने के बाद लगातार कोर्ट की चौखट पर पहुंच रहे अभ्यर्थी
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं और एजेंसी विवाद को आधार बनाते हुए कुल 22 नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। इस फैसले के बाद से ही विभिन्न परीक्षाओं में शामिल और चयनित अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर लगातार अदालत की शरण ले रहे हैं।

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