तिरंगे में लिपटा आया बेगूसराय का वीर सपूत, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बेगूसराय पहुंचा तो बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी।


बेगूसराय: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह शहीद हो गए। ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां करीब दो दिनों तक वेंटिलेटर पर उनका इलाज चला। बुधवार को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
शहीद जवान का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर बेगूसराय के रतनपुर स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचा तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। मनीष के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचते ही गमगीन हुआ रतनपुर
मनीष कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम बार देखने के लिए पहुंच रहा था। गांव में मातम का माहौल है और परिवार के लोगों को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे।
शहीद जवान के सम्मान में रतनपुर से तिरंगा यात्रा भी निकाली गई। यात्रा हर-हर महादेव चौक पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर मनीष कुमार को श्रद्धांजलि दी। ‘शहीद मनीष कुमार अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
ड्यूटी के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
परिजनों के मुताबिक, करीब चार दिन पहले कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान मनीष कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मनीष कुमार सिंह बीएसएफ जवान के तौर पर जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील कुपवाड़ा क्षेत्र में तैनात थे। परिवार के अनुसार, उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता दी। परिजनों ने यह भी बताया कि मनीष ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील अभियानों में भी जिम्मेदारी निभाई थी।
परिजनों के अनुसार, मनीष कुमार के शरीर पर गोली लगने के पुराने निशान भी थे। परिवार का कहना है कि सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती के दौरान उन्होंने कई बार जोखिम उठाया था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। रतनपुर के लोग मनीष को मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति के तौर पर याद कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, छुट्टी पर घर आने के दौरान वह सभी से आत्मीयता से मिलते थे और लोगों का हालचाल लेते थे।
'पूरे रतनपुर का गौरव थे मनीष'
मनीष की शहादत से पूरा गांव भावुक है। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष केवल अपने परिवार के बेटे नहीं, बल्कि पूरे रतनपुर और बेगूसराय के गौरव थे। तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने भी शहीद जवान के प्रति स्थानीय लोगों के सम्मान को दिखाया। हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने वीर जवान को श्रद्धांजलि दी और उनकी शहादत को नमन किया। आज रतनपुर ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, वहीं गांव के लोग मनीष कुमार को उनकी सेवा और देश के प्रति समर्पण के लिए लंबे समय तक याद रखेंगे।
(बेगूसराय से बबलू की रिपोर्ट)

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