दूसरी पत्नी को पेंशन मिलने पर पटना हाई कोर्ट का बड़ा फ़ैसला!
पटना हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले ने फैमिली पेंशन से जुड़े अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे कई मामलों पर असर डाल सकता है।


पटना: पटनाहाई कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और फैमिली पेंशन से जुड़े एक केस में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जब तक देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं होती है तब तक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वेद दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने बिहार सरकार और उससे संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर पेंशन स्वीकृत करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश भी दिया है।
खातून ने की थी पेंशन की मांग
लखीसराय की निवासी नजमा खातून ने अपने पति स्वर्गीय मोहम्मद उस्मान जो एक सरकारी कर्मचारी थे, के निधन के बाद फैमिली पेंशन की मांग की थी। उनके पति का निधन 14 अक्टूबर 2024 को हुआ था। राज्य सरकार ने दलील दी की दूसरी शादी के लिए विभागीय अनुमति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वहीं महालेखाकार कार्यालय का कहना था कि वह सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति मिलने पर ही पेंशन जारी कर सकते हैं।
फिर कोर्ट ने किन आधारों पर सुनाया फैसला?
कोर्ट के न्यायमूर्ति पूर्णेन्दु सिंह की एकल पीठ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की बात करता है लेकिन जब तक इस संबंध में कानून लागू नहीं होता तब तक मुस्लिम समुदाय के विवाह और पारिवारिक मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ ही प्रभावी रहेगा।
दो सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो...
बिहार सरकार के वित्त विभाग की 27 जून 2011 की अधिसूचना का हवाला देते हुए अपने फैसले को सही ठहराया। अधिसूचना में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वेद विवाह करने वाली जीवित विधवा को फैमिली पेंशन का हिस्सा माना गया है। कोर्ट ने यह भी बताया कि अधिसूचना अभी भी प्रभावित है और इसे वापस नहीं लिया गया है।

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