शौचालय जाने की इजाजत नहीं मिली तो कक्षा में छात्रा के साथ हुआ शर्मनाक वाकया! अभिभावक ने DEO से मांगी कार्रवाई
सुपौल के एक सरकारी स्कूल में छात्रा को शौचालय जाने की अनुमति नहीं मिलने के आरोप ने स्कूल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावक ने प्रधानाध्यापिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है


सुपौल: पिपरा प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मुस्लिम टोला, निर्मली में एक छात्रा के साथ कथित रूप से हुई अमानवीय घटना को लेकर उसके अभिभावक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल को लिखित आवेदन देने की बात कही है प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शौचालय जाने की अनुमति नहीं मिलने का आरोप
शिकायत के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को विद्यालय में पढ़ाई के दौरान छात्रा ने कई बार शौचालय जाने की अनुमति मांगी, लेकिन आरोप है कि विद्यालय प्रधानाध्यापिका के द्वारा शौचालय का ताला खोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके कारण छात्रा अपने आप को नियंत्रित नहीं कर सकी और कक्षा में ही उसके साथ शर्मनाक घटना हो गई। इस घटना से छात्रा को गहरा मानसिक आघात, अपमान और असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शिकायत में कहा गया है कि अन्य बच्चों के सामने हुई इस घटना से छात्रा का आत्मसम्मान भी प्रभावित हुआ है।
अभिभावक का आरोप है कि विद्यालय में बच्चों की गरिमा, सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। उन्होंने मौखिक शिकायत की बात कही है में उनका कहना विद्यालय प्रशासन के विरुद्ध पहले भी मौखिक शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसी घटना दोबारा सामने आई।
शिक्षिका बोलीं- आरोप गलत, शौचालय खुला रहता है
शिकायतकर्ता ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, विद्यालय में बच्चों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल शौचालय जाने की अनुमति सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।इस समंघ में विद्यालय अध्यापिका शोभा भारती से बात किया गया तो उन्होंने कहा यह आरोप झूठा है मैं विद्यालय के शौचालय के ताला खोल कर रखती हूं
आवेदन मिला तो होगी जांच
यह मामला बच्चों के सम्मान, सुरक्षा और विद्यालयों में संवेदनशील व्यवहार से जुड़ा है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई किया जाना आवश्यक होगा, ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक या विद्यालय प्रशासन ऐसी लापरवाही करने का साहस न करे और प्रत्येक छात्र-छात्रा को सुरक्षित एवं सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके। हालांकि इस संबंध में पिपरा प्रखंड बीओ मणिकांत कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में हमें आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है अगर आवेदन प्राप्त होता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी
(रिपोर्ट - कुंदन कुमार, सुपौल )

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