105 KM की यात्रा... लेकिन इन 2 कांवड़ियों ने जो किया, उसे देखने के लिए रास्ते में रुक रहे हैं लोग!
श्रावण की कांवड़ यात्रा में इस बार दो शिवभक्त अपनी अनोखी भक्ति की वजह से हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। उनकी यात्रा का अंदाज देख लोग रुककर तस्वीरें ले रहे हैं और 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगा रहे हैं।


सावन के महीने में सुल्तानगंज से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवड़िया पथ पर इन दिनों आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। भगवा वस्त्रों पहने लाखों शिवभक्त कंधों पर कांवड़ लेकर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारो के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन इस बार असरगंज में दो ऐसे कांवड़िए नजर आए, जिन्होंने अपनी अनोखी भक्ति से हर किसी को ठहर कर देखने पर मजबूर कर दिया। एक श्रद्धालु महादेव के प्रिय डमरू के आकार की कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरे हाथों के बल पूरी कांवड़ यात्रा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। दोनों की अनोखी यात्रा अब कांवड़िया पथ पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
डमरू वाली कांवड़... जिसे देखने रुक रहे हैं श्रद्धालु
असरगंज के कच्ची कांवड़िया रास्ते पर लोगों की नजर एक विशाल डमरू के आकार की कांवड़ पर पड़ी और हर कोई उसे देखने के लिए रुक गया। यह अनोखी कांवड़ झारखंड के धनबाद जिले के निवासी अजय विश्वकर्मा, बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर लेकर बढ़ रहे हैं। अजय सात वर्षों से लगातार सुल्तानगंज से बाबाधाम तक पैदल कांवड़ यात्रा करते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने अपनी भक्ति को नया रूप देने के लिए महादेव के प्रिय वाद्य डमरू के आकार की विशेष कांवड़ तैयार कराई। रास्ते में जहां-जहां अजय पहुंचते हैं, वहां श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, वीडियो बनाते हैं और 'हर-हर महादेव' के जयकारे भी लगाते हैं। अजय कहते हैं कि लोगों का यह प्यार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
पैरों से नहीं... हाथों के बल बाबाधाम जा रहे हैं 'बिच्छू बम'
अजय से कुछ दूर आगे बढ़ने पर श्रद्धालुओं की नजर एक और अनोखे शिव भक्ति पर पड़ जाती है। पश्चिम बंगाल के राजकुमार मैं तो पैरों से नहीं बल्कि दोनों हाथों के बल से बाबा धाम की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। उनकी यात्रा करने की मुद्रा बिल्कुल बिच्छू जैसी दिखाई देती है। यही वजह है कि लोग उन्हें प्यार से 'बिच्छू बम' कह कर बुला रहे हैं। राजकुमार कुछ दूर हाथों के सहारे तय करने के बाद थोड़ी देर विश्राम कर दोबारा इस अंदाज में अपनी यात्रा शुरू कर देते हैं।
राजकुमार बताते हैं कि वह पिछले दो वर्ष से देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों की कठिन यात्रा करते रहे हैं। अबतक वह 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम और 51 शक्तिपीठों में से 21 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा भी वह कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यात्रा कर चुके हैं। उनकी यात्रा की रफ्तार धीमी जरूर है पर उनका संकल्प अडिग है।
बाबा धाम तक का कावड़िया पद हर साल लाखों से भक्तों की आस्था का साक्षी बनता आया है। कोई सामान्य कावड़ लेकर चलता है तो कोई अपने संकल्प और अनोखे अंदाज को दुनिया के सामने रखता है।

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