जर्जर भवन में पढ़ रहे 168 नौनिहाल, बारिश में टपकती है छत; कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
अरवल के कुर्था प्रखंड स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय सचई में 168 बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। दो विद्यालयों के लिए सिर्फ दो कमरे और एक बरामदा है। बारिश में छत से पानी टपकता है और छज्जों में दरारें हैं।


अरवल: एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार योजनाओं और संसाधनों पर खर्च कर रही है, वहीं कुर्था प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सचई में बच्चों की पढ़ाई बदहाल भवन के बीच हो रही है। विद्यालय की जर्जर स्थिति के कारण यहां पढ़ने वाले 168 बच्चे हर दिन हादसे के खतरे के बीच पढ़ने को मजबूर हैं।
स्थिति यह है कि दो विद्यालयों के बच्चों के लिए महज दो जर्जर कमरे और एक बरामदा उपलब्ध है। बरसात के दिनों में विद्यालय की खराब छत से पानी टपकता है। वहीं भवन के छज्जे में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे में बच्चों के साथ शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
एक ही भवन में चल रहे दो विद्यालय
भवन की कमी के कारण नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सचई दक्षिणी का संचालन भी इसी भवन में किया जा रहा है। दोनों विद्यालयों में कुल 168 बच्चे नामांकित हैं। इनमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय सचई में 81 बच्चे, जबकि नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सचई दक्षिणी में 87 बच्चे पढ़ते हैं। कमरों की संख्या कम होने के कारण बच्चों को बैठाने और पढ़ाई कराने में शिक्षकों को भी काफी परेशानी होती है। बरामदे का इस्तेमाल भी कई जरूरी गतिविधियों के लिए करना पड़ता है।
बरामदे में बनता है बच्चों का मध्याह्न भोजन
जगह की कमी का असर विद्यालय की दूसरी व्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन भी बरामदे में ही तैयार करना पड़ता है। बारिश के दौरान यह व्यवस्था और मुश्किल हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। जर्जर छत और टूटते छज्जे के बीच छोटे बच्चों की पढ़ाई कराना किसी भी समय परेशानी का कारण बन सकता है।
इसी स्कूल से निकले छात्र पहुंचे बड़े पदों तक
ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय की वर्तमान स्थिति भले ही चिंताजनक हो, लेकिन इस स्कूल का अतीत उपलब्धियों से भरा रहा है। यहां पढ़ने वाले कई छात्र आगे चलकर मेडिकल, इंजीनियरिंग, रेलवे, सेना और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस विद्यालय ने क्षेत्र के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर दिया, आज उसी विद्यालय को बेहतर भवन और मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
विद्यालय की जर्जर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से भवन की जल्द मरम्मत कराने या नए भवन का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस समस्या का संज्ञान लेकर जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि बच्चों को जर्जर कमरों और टपकती छत के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
(अरवल से निशांत मिश्र की रिपोर्ट)

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