हां, मुझे पता था..., JPSC-CGL फर्जीवाड़े में पूर्व चेयरमैन का सनसनीखेज खुलासा, 15 करोड़ के 'मनी ट्रेल' ने खोली पोल
JPSC-CGL फर्जीवाड़े की CID जांच में 15 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मनी ट्रेल की बात सामने आई है। पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते और TDPL से जुड़े लेनदेन की जांच जारी है।

JPSC-JSSC Scam: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच अब अपने सबसे अहम और रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी (CID) की जांच में अब करोड़ों रुपये के लेनदेन यानी 'मनी ट्रेल' के पुख्ता सबूत मिलने शुरू हो गए हैं। JPSC के तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांग्ते और परीक्षा का आयोजन कराने वाली टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के बीच पैसों के बड़े लेनदेन के साक्ष्य पुलिस के हाथ लगे हैं। सूत्रों की मानें तो जेपीएससी की 14वीं पीटी परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में अब तक 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का मनी ट्रेल सामने आ चुका है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, ये आंकड़ा और भी बड़ा होने वाला है।
यूपी की तर्ज पर झारखंड में भी सेट हुई थी 'नौकरी की दुकान'
जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि JPSC की परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल ने जिस तरह झारखंड में युवाओं के भविष्य से खेला, ठीक उसी तर्ज पर उसने पहले उत्तर प्रदेश में भी नौकरियां बेची थीं। यूपी विधान परिषद की नौकरियों में भी इसी कंपनी ने भयंकर फर्जीवाड़ा किया था, जहां नेताओं के रिश्तेदारों और कंपनी के करीबियों को गलत तरीके से नौकरी बांटी गई थी। उसी तर्ज पर झारखंड में भी कंपनी के डायरेक्टर और मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने अपने परिवार वालों और कंपनी के अकाउंटेंट रक्षक सिंह तक को JPSC और CGL की परीक्षाओं में पास करा दिया। CID ने मास्टरमाइंड अभय तिवारी, उसके भाई और रिश्तेदारों के बैंक खातों को खंगाला है, जिसमें करोड़ों के हेरफेर का भंडाफोड़ हुआ है।
पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते ने पूछताछ में कबूली अपनी बड़ी गलती
इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा खुलासा JPSC के तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांग्ते के कबूलनामे से हुआ है। CID की कड़ी पूछताछ के दौरान ख्यांग्ते ने आखिरकार मान लिया है कि परीक्षा के आयोजन में भारी गलतियां हुई थीं और दागी कंपनी TDPL को टेंडर देना उनकी सबसे बड़ी भूल थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि उन्हें परीक्षार्थियों की ओएमआर (OMR) शीट में हो रही छेड़छाड़ और गड़बड़ी की पूरी जानकारी थी। उनके ही इशारे पर JPSC के परीक्षा उप नियंत्रक ने टीडीपीएल के साथ मिलकर ये सारा खेल रचा था।
रिमांड पर लिए गए एजेंटों से उगलवाए जा रहे गहरे राज
CID इस रैकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ने में लगी हुई है। पुलिस ने JPSC-PT परीक्षा के सफल अभ्यर्थी और इस रैकेट के एजेंट उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा को रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की है। इनसे इस बात की पूरी डिटेल निकलवाई जा रही है कि मास्टरमाइंड अभय तिवारी और अन्य एजेंटों के नेटवर्क में कितने अभ्यर्थी शामिल थे और नौकरियां बेचने की चेन कैसे काम करती थी। 5 दिन की लंबी रिमांड खत्म होने के बाद अब इन तीनों आरोपियों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। इस खुलासे के बाद तय है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।
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