World Radio Day: विश्व रेडियो दिवस उस माध्यम को सम्मानित करता है जो आज भी लाखों लोगों से बात करता है- अक्सर सिर्फ एक सिग्नल और एक साधारण रिसीवर के सहारे. स्मार्टफोन और स्ट्रीमिंग ऐप्स के आने से बहुत पहले, रेडियो घरों, खेतों और दुनिया के दूर-दराज के कोनों में एक साथी बन जाया करता था. वहीं पुराने समय में नेता जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए रेडियो के माध्यम का ही चुनाव किया करते थे.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी क्रांतिकारी सोच के प्रसार और अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने के लिए जर्मनी में (1942) आजाद हिन्द रेडियो की स्थापना की थी. आज भी, इसकी ताकत इसकी सादगी में निहित है: न इंटरनेट, न महंगे गैजेट, न ही डिजिटल सीखने की कोई झंझट- बस ध्वनि दूरियों तक जाती है, सूचना, संगीत और आवाजों को आर्थिक, भौगोलिक और सामाजिक विभाजनों से परे ले जाती है.
नेताजी का रेडियो पर संबोधन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 'आजाद हिंद रेडियो' (1942-1945) के माध्यम से देशवासियों को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया. उनके ओजस्वी रेडियो संबोधनों ने जनता में जोश भर दिया, जिसमें "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" और "दिल्ली चलो" के नारों के साथ "आजादी की लड़ाई में" एकजुट होने का आह्वान प्रमुख था.
हर साल 13 फरवरी को, यह दिन सामुदायिक शिक्षा, लोकतंत्र और अंतर-सांस्कृतिक व अंतर-क्षेत्रीय संबंधों में रेडियो के योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है. शुक्रवार को, प्रधानमंत्री मोदी ने भी विश्व रेडियो दिवस पर रेडियो के महत्व की सराहना की.
विश्व रेडियो दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
विश्व रेडियो दिवस 2026 के अवसर पर, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो के महत्व पर जोर दिया. साथ ही, उन्होंने जनता से अपने आगामी कार्यक्रम 'मन की बात' के लिए सुझाव भेजने का आग्रह किया, जिसका प्रसारण रविवार, 22 फरवरी को होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट किया
"विश्व रेडियो दिवस एक ऐसे माध्यम का जश्न मनाने का दिन है जो दूरदराज के गांवों से लेकर हलचल भरे शहरों तक, लोगों की विश्वसनीय आवाज है. वर्षों से, रेडियो समय पर सूचना पहुंचाता रहा है, प्रतिभा को निखारता रहा है और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता रहा है. यह दिन इस माध्यम से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों को सम्मानित करने का दिन है."
उन्होंने आगे कहा, "मन की बात के माध्यम से मैंने रेडियो की उस क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है, जिसके द्वारा यह हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को सामने ला सकता है. इस महीने का कार्यक्रम रविवार, 22 फरवरी को प्रसारित होगा. कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें."
विश्व रेडियो दिवस 2026 का विषय
विश्व रेडियो दिवस 2026 का विषय "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ रेडियो" है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि "कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक उपकरण है, आवाज नहीं." यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार रेडियो प्रसारण को बदल रही है, साथ ही पत्रकारिता में मानवीय विवेक, नैतिकता और रचनात्मकता के महत्व को भी रेखांकित करता है.
विश्व रेडियो दिवस का इतिहास
विश्व रेडियो दिवस एक वैश्विक आयोजन है जो सूचना देने, शिक्षित करने, लोगों को एकजुट करने और समुदायों को सशक्त बनाने में रेडियो की क्षमता पर बल देता है. इसका आयोजन यूनेस्को द्वारा किया जाता है और इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त है. पहली बार 2012 में मनाया गया, इसे यूनेस्को द्वारा 2011 में घोषित किया गया था.
संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की तिथि 13 फरवरी, 1946 निर्धारित की गई थी. तब से, इस दिन को विश्व भर के प्रसारकों के लिए समर्थन को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष मनाया जाता है.









