बच्चे घर क्यों नहीं पहुंचे?, फोन मिलाते-मिलाते परेशान हुए अभिभावक ; रांची में जाम से बेहाल हुई जनता
बच्चों के तय समय पर न पहुंचने से घबराए परिजन लगातार स्कूल प्रबंधन और बस ड्राइवरों को फोन लगाकर जानकारी जुटाने में लगे रहे। शहर की लगभग सभी स्कूल बसें अपने तय स्टॉपेज पर एक से दो घंटे की भारी देरी से पहुंचीं, जिससे पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Ranchi Traffic: झारखंड की राजधानी रांची में बेकाबू होती भीड़ और बेलगाम ट्रैफिक जाम ने आम जनता की जिंदगी मुहाल कर दी है। शहर की मुख्य सड़कों पर घंटों लग रहे जाम का सबसे दर्दनाक असर आज स्कूली मासूमों पर पड़ा। स्कूलों की छुट्टी होने के बाद अपने घरों को निकले बच्चे घंटों तक सड़कों पर जाम में फंसी बसों में भूखे-प्यासे बिलखते रहे। उधर बस स्टॉप पर खड़े माता-पिता अपने जिगर के टुकड़ों का इंतजार करते-करते बेहाल हो गए। बच्चों के तय समय पर न पहुंचने से घबराए परिजन लगातार स्कूल प्रबंधन और बस ड्राइवरों को फोन लगाकर जानकारी जुटाने में लगे रहे। शहर की लगभग सभी स्कूल बसें अपने तय स्टॉपेज पर एक से दो घंटे की भारी देरी से पहुंचीं, जिससे पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से सिकुड़ीं राजधानी की सड़कें
रांची की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था का विश्लेषण करें तो इस महाजाम के पीछे कई बड़ी लापरवाहियां साफ नजर आती हैं। त्योहारी सीजन के दौरान सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव तो है ही, लेकिन मुख्य सड़कों और फुटपाथों पर दुकानदारों का कब्जा, बेतरतीब अवैध पार्किंग और ऑटो-ई-रिक्शा चालकों की मनमानी आग में 'घी' का काम कर रही है। हालांकि हाल ही में नगर निगम ने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास कुछ अतिक्रमण हटाने की औपचारिकता निभाई थी, लेकिन इसका कोई स्थायी असर जमीन पर नहीं दिखा। प्रमुख चौराहों पर सड़क किनारे वाहनों की अवैध कतारों ने चौड़ी सड़कों को संकरी गलियों में तब्दील कर दिया है, जिससे पीक आवर में गाड़ियां रेंगने पर मजबूर हो जाती हैं।

सिटी बसों की मनमानी और सार्वजनिक परिवहन की लचर व्यवस्था
शहर के भीतर चलने वाली सिटी बसों और अन्य यात्री वाहनों के रुकने का कोई तय नियम न होना भी जाम का एक प्रमुख कारण है। जहां चाहा वहीं बस रोक देने की आदत के चलते पीछे चल रहे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके अलावा शहर के प्रमुख चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की मौजूदगी के बावजूद उसका प्रभावी और वास्तविक इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, जिसका खामियाजा रोज आम मुसाफिरों और स्कूल से लौटते मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

आखिर कब मिलेगी जाम से स्थायी निजात, प्रशासन को बनानी होगी ठोस योजना
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या राजधानी रांची को कभी इस दमघोंटू जाम से हमेशा के लिए आजादी मिलेगी। जानकारों का मानना है कि इसके लिए कागजी दावों से इतर सड़क किनारे से अतिक्रमण पर लगातार और सख्त बुलडोजर कार्रवाई, केवल निर्धारित स्टॉप पर ही बसों के ठहराव की पाबंदी और व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था लागू करनी होगी। इसके साथ ही स्कूल के छूटने और लगने के पीक ऑवर्स में स्कूल बसों के लिए अलग ग्रीन कॉरिडोर या विशेष ट्रैफिक प्रबंधन बेहद जरूरी है। शहर में पहले से मौजूद एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (Adaptive Traffic Control System) का सही इस्तेमाल कर ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन को मिलकर एक ठोस और स्थायी प्लान तैयार करना होगा, ताकि राजधानी की सड़कों पर नौनिहालों और आम जनता का सफर सुरक्षित और सुगम हो सके।
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