जहां कभी नक्सलवाद का साया था, अब वहां बनेगा टूरिज्म हब! जमुई में DM का बड़ा प्लान
नक्सलवाद के लंबे दौर से बाहर निकल रहा जमुई अब पर्यटन के जरिए विकास की नई राह तलाश रहा है। जिला प्रशासन गिद्धेश्वर-गरही क्षेत्र को पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी में है, जिसमें प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ा जाएगा।


जमुई: कभी नक्सलवाद के लंबे दौर से जूझने वाला जमुई अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन संभावनाओं के जरिए नई पहचान बनाने की तैयारी में है। जिला प्रशासन गिद्धेश्वर-गरही क्षेत्र को पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी ने अरुणमाबाग पंचायत के परासी गांव के पास स्थित एक पठारनुमा टीले का दौरा किया।
गिद्धेश्वर-गरही मुख्य मार्ग पर स्थित परासी टीले का जिलाधिकारी ने विस्तृत भ्रमण किया। टीले के ऊपर से चारों ओर फैली हरी-भरी घाटियां और प्राकृतिक हरियाली इस इलाके की पर्यटन क्षमता की झलक देती है। प्रशासन की योजना सिर्फ एक पर्यटन स्थल विकसित करने तक सीमित नहीं है। इसके तहत क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को एक साथ जोड़कर एक एकीकृत पर्यटन कॉरिडोर तैयार करने की तैयारी है।
‘पर्यटन से बदलेगी लोगों की जिंदगी’
पर्यटन विकास की संभावनाओं को देखते हुए डीएम इससे पहले पंचभूर झरना और घनवेरिया की प्रसिद्ध पेड़ा दुकानों का भी निरीक्षण कर चुके हैं। प्रशासन इन अलग-अलग आकर्षणों को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है, जिससे आने वाले पर्यटक एक ही यात्रा में क्षेत्र के प्राकृतिक, धार्मिक और स्थानीय आकर्षणों का अनुभव कर सकें।
जिलाधिकारी ने कहा कि जमुई के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती के अवसर सीमित हैं। ऐसे में पर्यटन स्थानीय लोगों की आय और रोजगार बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि करीब ढाई दशक तक नक्सलवाद की चुनौती झेल चुके इस क्षेत्र में अब विकास की नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं। प्रशासन की योजना में धार्मिक पर्यटन के साथ ट्रैकिंग और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा देना शामिल है।
युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद
परासी टीले के निरीक्षण के दौरान डीएम ने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।अगर योजना जमीन पर उतरती है तो स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड, परिवहन, खान-पान और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
नक्सलवाद की पहचान से बाहर निकलकर पर्यटन की पहचान बनाने की जमुई की यह कोशिश कितनी सफल होती है, यह आने वाले समय में सामने आएगा। लेकिन परासी से शुरू हुई यह पहल इलाके के लिए विकास की एक नई उम्मीद जरूर जगाती है।
(जमुई से विक्रम कुमार विक्रांत की रिपोर्ट)

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