हाईकोर्ट ने हटवाया अतिक्रमण, फिर रातों-रात सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश? चामोली बाजार में मचा बवाल
नालंदा के चामोली बाजार में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमणमुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने नगर विकास मंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग की है।


नालंदा: पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमणमुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश का आरोप सामने आया है। मामला वेना थाना क्षेत्र के सुपासंग गांव और NH-20 स्थित चामोली बाजार से जुड़ा है। स्थानीय निवासी संजय कुमार ने बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री को आवेदन देकर मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की है।हाईकोर्ट के आदेश के बाद हटाया गया था अतिक्रमण
आवेदन में कहा गया है कि पटना हाईकोर्ट ने CWJC No. 7859/2024 में 25 जून 2025 को चामोली बाजार क्षेत्र में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए संबंधित जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि अतिक्रमण हटने के कुछ समय बाद ही उसी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश शुरू हो गई।
रात में दोबारा कब्जे की कोशिश का आरोप
संजय कुमार के मुताबिक, कुछ लोगों ने कथित तौर पर रात के समय अतिक्रमणमुक्त जमीन पर लाठी-खंभे लगाकर दोबारा कब्जा जमाने की कोशिश की। आवेदन में दुकान और मकान निर्माण की तैयारी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने पेट्रोल पंप, जनरल स्टोर समेत अन्य निर्माण कार्यों का भी उल्लेख करते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार, मामले को लेकर अंचल प्रशासन, जिला प्रशासन और राज्य स्तर के अधिकारियों को पहले भी लिखित शिकायत दी गई है। हालांकि, शिकायतकर्ता का दावा है कि अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जा चुका था, तो उसी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश कैसे शुरू हो गई।
कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाने की बात
संजय कुमार ने सरकार से सरकारी जमीन की दोबारा जांच कराने, कथित अतिक्रमण को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने आवेदन में यह भी कहा है कि यदि प्रशासन की ओर से समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वह मामले को दोबारा न्यायालय के समक्ष ले जा सकते हैं। फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासन की जांच या संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी जमीन पर दोबारा अतिक्रमण हुआ है या नहीं।
(नालंदा से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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