अधिकारियों ने दिव्यांग अमित का स्वीकारा आवेदन, कहा- 'व्हीलचेयर दे देंगे, बैटरी साइकिल नहीं'
Naxatra News द्वारा गोड्डा के रहने वाले अमित की इलेक्ट्रॉनिक साइकिल की मांग को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आई है. अधिकारी अब भी पूरी तरह से मांग मानने को तैयार नहीं दिख रहे. उनका कहना है कि अभी केवल व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जा सकती है, न कि बैटरी साइकिल.

Jharkhand (Godda): जिले में एक बार फिर नक्षत्र न्यूज़ की खबर का असर साफ नजर आया है. महीने में तीन-तीन बार 80 फीसदी दिव्यांग अमित कुमार मंडल सदर प्रखंड कार्यालय गोड्डा का चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर बार मायूस होकर घर लौटना पड़ा. लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा. आखिरकार नक्षत्र न्यूज़ ने जब उनके दर्द को आवाज दी, तो प्रखंड विकास पदाधिकारी दयानंद जायसवाल तक बात पहुंची. अब अमित की उम्मीदों को पंख लग चुके हैं. उसे बैटरी से चलने वाली ट्राई साइकिल मिलने की आस जगी है.

"आवेदन लेने को तैयार नहीं थे अधिकारी!"
बीडीओ दयानंद जायसवाल का कहना है कि अमित ने आज उनके पास निवेदन पत्र दिया है. वहीं अमित का आरोप है कि वह तीन बार प्रखंड कार्यालय आया, लेकिन उसकी एप्लीकेशन लेने को कोई तैयार ही नहीं था. सवाल यह है कि अगर आवेदन ही नहीं लिया जा रहा, तो दिव्यांग आखिर जाए तो जाए कहां? बीडीओ ने बताया कि अमित का आवेदन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) को अग्रसारित कर दिया गया है. अनुरोध किया गया है कि यदि बैटरी वाली ट्राई साइकिल उपलब्ध हो, तो तत्काल भेजने का प्रबंध किया जाए.

"आज आया है, तो कर रहे हैं मांग पर विचार"
CDPO रीता बेसरा-
व्हीलचेयर दे देंगे लेकिन बैटरी वाला ट्राई साइकिल मेरे प्रावधान में नहीं है
इधर CDPO रीता बेसरा का कहना है कि अमित पहले उनके कार्यालय नहीं आया था, आज आया है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब अमित की मुलाकात बड़े साहब से हुई, तब जाकर उसके लिए दफ्तर के दरवाजे खुले. CDPO ने साफ कहा कि उनके विभाग से व्हीलचेयर देने का प्रावधान है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्राई साइकिल देने का नहीं. अब सवाल सत्ता के गलियारों तक गूंज रहा है राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्थानीय विधायक, जिले में बैठे मंत्री और डीसी साहब से सीधा सवाल है क्या 80% दिव्यांग अमित को बैटरी वाला ट्राई साइकिल मिलेगा या वह यूं ही दफ्तरों की धूल फांकता रहेगा?
"..इसके मिलने से जिंदगी हो जाएगी थोड़ी बेहतर"
अमित का दर्द भी उतना ही सच्चा है. वह कहता है कि उसे बैटरी वाली ट्राई साइकिल इसलिए चाहिए ताकि उसकी रोजी-रोटी चल सके. छोटी-सी दुकान ही उसका सहारा है. अगर यह एक साधन उसके पास हो तो उसे सामान लाने-ले जाने में काफी सुविधा होगी.
नक्षत्र न्यूज अमित की आवाज तब तक उठाता रहेगा जब तक उसकी मांग पूरी नहीं कर ली जाती, यानी उसे इलेक्ट्रॉनिक साइकिल उपलब्ध नहीं करा ली जाती.
रिपोर्ट: प्रिंस यादव
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