रोहतास में बाल संरक्षण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, परिवार से जोड़ने और सुरक्षित देखभाल पर जोर
सासाराम में बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। रोहतास समेत चार जिलों के बाल संरक्षण कर्मियों ने हिस्सा लिया।


सासाराम। बिहार में बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को सासाराम में दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-क्षमता वर्धन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘हर बच्चे के लिए स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण और सुरक्षित वैकल्पिक देखभाल’ रखा गया है। प्रशिक्षण में बच्चों को संस्थागत देखभाल में लंबे समय तक रखने के बजाय उन्हें सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक माहौल से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
यह कार्यक्रम राज्य बाल संरक्षण समिति और समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से मिरेकल फाउंडेशन इंडिया की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
चार जिलों के बाल संरक्षण कर्मी हुए शामिल
प्रशिक्षण में रोहतास के अलावा औरंगाबाद, कैमूर और भोजपुर के बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी और कर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), बाल कल्याण समिति (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और बाल देखभाल संस्थानों (CCI) के अधीक्षक, केस वर्कर, काउंसलर समेत अन्य हितधारक शामिल हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन रोहतास की उप विकास आयुक्त डॉ. आकांक्षा आनंद ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का उचित पुनर्वासन कर उन्हें परिवार के माहौल से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है। उनका प्रयास होना चाहिए कि कोई भी बच्चा लंबे समय तक संस्थागत देखभाल में न रहे और उसे जल्द से जल्द सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
जिला बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक विनीता कुमारी ने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े हितधारकों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण काफी उपयोगी हैं। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की समझ और कार्यक्षमता बढ़ती है।
परिवार आधारित देखभाल पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान Family Based Care, Adoption, Foster Care, Sponsorship और After Care जैसे वैकल्पिक देखभाल के मॉडलों पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है। बाल अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने कहा कि बाल संरक्षण केवल संस्थागत देखभाल तक सीमित नहीं होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना इसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के बिहार स्टेट हेड दीपक कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करते हुए उसे परिवार और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना बाल संरक्षण का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने बिहार को बाल-मैत्री राज्य बनाने की दिशा में काम करने की बात कही।
किशोर न्याय कानून और केस मैनेजमेंट पर भी चर्चा
दो दिवसीय प्रशिक्षण में किशोर न्याय अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के साथ बच्चों की पहचान, उनकी जरूरतों का आकलन, केस मैनेजमेंट, परिवार से पुनः एकीकरण और पुनर्वास की प्रक्रिया जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा बाल अधिकार और बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी मंथन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश रंजन, परिवर्तन विकास के बिनोद कुमार समेत कई अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रशिक्षण सत्र का संचालन मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के मास्टर ट्रेनर्स विष्णु दत्त पांडेय और जितेंद्र पंडित कर रहे हैं। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को होगा।
(विकाश चन्दन की रिपोर्ट)

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