फूस की झोपड़ी में चल रहा सरकारी स्कूल, 6 दशक बाद भी नहीं मिला भवन; 210 बच्चे पढ़ने को मजबूर
सुपौल के प्रतापगंज प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय मोमनाही में स्थापना के करीब छह दशक बाद भी पक्का भवन नहीं बन सका है।


बिहार सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन सुपौल जिले की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। प्रतापगंज प्रखंड के सूर्यापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय मोमनाही में स्थापना के करीब छह दशक बाद भी स्कूल को अपना पक्का भवन नसीब नहीं हुआ है। आज भी यहां बच्चों की पढ़ाई टिन, बांस और टाट से बनी फूस की झोपड़ीनुमा संरचना में कराई जा रही है।
विद्यालय में फिलहाल 210 बच्चे नामांकित हैं और चार शिक्षक-शिक्षिकाएं पदस्थापित हैं। भवन के अभाव में एक ही झोपड़ीनुमा कमरे में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी है।
1965 में हुई थी स्कूल की स्थापना, आज भी झोपड़ी में पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय मोमनाही की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी। यानी स्कूल को शुरू हुए करीब छह दशक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यहां स्थायी स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो सका है।
ग्रामीणों के मुताबिक, भवन नहीं होने के कारण उनके सहयोग से टिन, बांस और टाट की मदद से झोपड़ीनुमा शेड तैयार कराया गया। फिलहाल इसी अस्थायी व्यवस्था में बच्चों की पढ़ाई चल रही है।
विद्यालय में चार शिक्षक-शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं स्कूल के किचेन शेड में फिलहाल कार्यालय का कामकाज किया जाता है। संसाधनों की कमी के बीच बच्चों को पढ़ाने की यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।
एक ही झोपड़ी में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे
विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के अनुसार, भवन नहीं होने के कारण कक्षा एक से पांच तक के सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक ही झोपड़ीनुमा फूस के घर में कराई जा रही है।
इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षकों के सामने भी परेशानी बनी रहती है। बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। शिक्षकों के मुताबिक, बरसात में स्कूल के आसपास पानी जमा हो जाता है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित होता है। ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन का कहना है कि स्थायी भवन के लिए कई बार विभाग के वरीय अधिकारियों को जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक भवन निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है।
BEO बोले- जल्द होगी पहल
मामले को लेकर प्रतापगंज के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) सीतेश कुमार झा ने बताया कि विद्यालय भवन की आवश्यकता के संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही इस दिशा में पहल की जाएगी। अब देखना होगा कि करीब छह दशक पुराने इस विद्यालय को कब अपना पक्का भवन मिलता है और यहां पढ़ने वाले 210 बच्चों को कब बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो पाता है।
(कुंदन कुमार की रिपोर्ट)

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