चैती छठ महापर्व का दूसरा दिन आज, खरना के साथ 36 घंटे का शुरू होगा निर्जला व्रत
चैती छठ के दूसरे दिन को खरना के रुप में मनाया जाता है. इस दिन सूर्यास्त के बाद व्रतियों द्वारा विशेष पूजा अर्चना की जाती है और इसके प्रसाद के रुप में खीर ग्रहण करती है. इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत होती है.

Chaiti Chhath 2026: लोक आस्था, श्रद्धा और महान संगम चैती छठ महापर्व रविवार (22 मार्च 2026) से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गई है. आज सोमवार (23 मार्च 2026) को इस पर्व का दूसरा दिन है चैती छठ के दूसरे दिन को खरना के रुप में मनाया जाता है. इस दिन सभी व्रतियां सूर्यास्त के बाद विशेष पूजा अर्चना करती हैं और इसके बाद प्रसाद के रुप में खीर ग्रहण करती है. इसके साथ ही 36 घंटे के व्रत की शुरुआत होती है. 
बता दें, चार दिवसीय चैती छठ महापर्व 22 मार्च (रविवार) से 25 मार्च (बुधवार) तक मनाया जाएगा. चैती छठ महापर्व प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है यह पर्व भगवान भास्कर और छठी मैया को समर्पित है. चैत्र छठ को विशेष रुप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भक्तिपूर्वक मनाया जाता है. इस पर्व में सुहागिन महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं पूरे भक्तिभाव से भगवान भास्कर (सूर्य देव) की आराधना करती हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और आस्था के साथ छठ महापर्व का पालन करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और सुख-समृद्धि, संतान सुख और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.
जानें, चैती छठ महापर्व की तिथियां
नहाय-खाय- 22 मार्च (रविवार) को नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व के पहले दिन की शुरुआत हुई. इस दिन व्रती पवित्र नदियां, तालाब, जलाशयों या घर में स्नान के बाद शुद्धता के साथ सात्विक भोजन (कद्दू की सब्जी, चावल और चने की दाल) ग्रहण करती है. तन और मन की शुद्धि के लिए इसे प्रथम चरण माना जाता है.
खरना- 23 मार्च (सोमवार) को खरना है यह चैती छठ का दूसरा दिन है. इस दिन व्रती शाम को सूर्य देवता की पूजा की पूजा करने के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण करेंगी. इसके बाद अगले 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखेंगी. इस दौरान व्रती जल ग्रहण नहीं करेंगी.
अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य- 24 मार्च (मंगलवार) को तीसरे दिन डूबते हुए भगवान भास्कर यानी अस्ताचलगामी सूर्य देव को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा. इस दिन व्रती और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पवित्र नदियां, तालाबों और जलाशयों में अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए जमा होंगी इस दौरान छठी मैया के गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा.
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य- 25 मार्च (बुधवार) को व्रतियों द्वारा उदीयमान सूर्य (उगते हुए सूर्य) को प्रातः अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही व्रत का पारण किया जाएगा. इसके साथ ही चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का समापन होगा.
छठ पर्व केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं
चार दिवसीय इस महापर्व के दौरान व्रती और सुहागिन महिलाएं श्रद्धा, संयम के साथ नियमों के साथ व्रत का पालन करती है. इससे छठी मैया उनके जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की असीम कृपा बरसाती हैं यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं है बल्कि प्रकृति और भगवान भास्कर उपासना को भी मुख्य तौर पर दर्शाती है.
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

Giridih: भक्ति की नहीं होती कोई उम्र और सीमा, श्रीमद्भागवत कथा से कथावाचक बृजेश्वरी ने दिया संदेश

Giridih: पंद्रह हजार कलशों के साथ भागवत पुराण की शुरुआत, मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में उमड़ा भक्तों का हुजूम







