Jarawa Tribe India: भारत के Andaman and Nicobar Islands में एक ऐसी जनजाति रहती है जो दूसरों को देखते ही उनपर हमला करना शुरू कर देती हैं. इस जनजाति को दुनिया के सबसे पुराने और सबसे अलग-थलग रहने वाले समुदायों में से एक मानी जाती है. जो छोटे-छोटे टुकड़ियों में अंडमान के जंगलों में रहती आई है. इस जनजाति के बारे में कहा जाता है कि वे बाहरी लोगों को देखते ही उनपर हमला कर देते है क्योंकि उन्हें लगता है कि बाहरी लोग उनके लिए खतरा है. इस जनजाति का नाम जरावा है.
जरावा जनजाति की काफी कम है आबादी
यह जरावा जनजाति है जो हजारों सालों से अंडमान निकोबार द्वीप समूह में रह रही हैं और आज भी वे अपने पारंपरिक जीवनशैली को बनाए हुए हैं आधुनिक युग से दूरियां बनाकर रखते है. वे धनुष-बाण से शिकार करते, मछली पकड़ते और जंगल के फल-फूल, शहद पर निर्भर रहते हैं. इनकी आबादी काफी कम है. इनकी संख्या करीब 400 से 500 के आसपास की मानी जाती है.
अजनबियों को अपने इलाके के लिए मानते हैं खतरा
बाहरी लोगों को देखते ही वे हमला कर देते हैं लेकिन वे बिना वजह हमला नहीं करते हैं बल्कि अपने जीवन और क्षेत्र की रक्षा के लिए ऐसा करते हैं उन्हें बाहरी दुनिया के लोगों पर तनिक भी भरोसा नहीं है. पहले बाहरी लोगों से संपर्क से जनजाति के लोगों में महामारी बीमारियां (जैसे- 1999 और 2006 में खसरा) और खतरे बढ़े थे. जिससे उनके दीर्घकालिक अस्तित्व के बारे में चिंता उत्पन्न हुई है. वजह यही है कि जरावा लोग अजनबियों को अपने इलाके में आने से उन्हें खतरा मानते हैं और उनको देखते ही उनपर तीर-कमान से हमला कर देते है.
बाहरी दुनिया से रखते हैं कम संपर्क
अंडमान में रहने वाली इस जरावा जनजाति के क्षेत्र को को भारत सरकार ने संरक्षित घोषित किया है. जिससे उनकी संस्कृति सुरक्षित रह सकें. इस जनजाति को भारत सरकार विशेष रुप से कमजोर जनजाति समूह (PVTGK) रुप में वर्गीकृत करती है. धनुष-बाण से शिकार करना जरावा जनजाति की मुख्य पहचान है. यह भारत की एक सबसे पुरानी और अलग-थलग रहने वाली जनजाति है और इस जनजाति के लोग अंडमान निकोबर द्वीप समूह के जगंलों में आधुनिक दुनिया से दूर अपने पारंपरिक तरीके से जीवन यापन करते हैं हैं. बाहरी दुनिया से वे कम संपर्क रखते हैं
जरावा दुनिया के सबसे पुराने जनजातियों में से एक है. माना जाता है यह जनजाति अफ्रीका से आने वाली सबसे शुरुआती मानव प्रवासियों में से है जो करीब 55 हजार से 60 हजार वर्षों से अंडमान निकोबर द्वीप समूह में रहते आ रहे है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनका संबंध नेग्रिटो समुदाय से है. इनकी संस्कृति और परंपराएं आज भी काफी हद तक वैसी ही हैं. जरावा जनजाति भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उनकी अलग-थलग जीवनशैली, परंपराएं और प्रकृति के साथ सामंजस्य उन्हें दुनिया की अनोखी जनजातियों में शामिल करती है.








