देश के IIT में शिक्षकों की भारी कमी, 38% से अधिक पद खाली
देश के IIT में शिक्षकों की भारी कमी, 38% से अधिक पद खाली

देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के 23 आईआईटी में स्वीकृत फैकल्टी पदों का लगभग 38.4 प्रतिशत हिस्सा अभी भी खाली है। कुल 12,498 स्वीकृत पदों में से 4,804 पर अब तक नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसका अर्थ है कि हर पांच में से लगभग दो शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
सबसे अधिक रिक्तियां आईआईटी पटना में दर्ज की गई हैं, जहां आधे से अधिक स्वीकृत पद खाली हैं। वहीं आईआईटी खड़गपुर भी शिक्षकों की कमी से गंभीर रूप से जूझ रहा है। इसके अलावा कई अन्य आईआईटी में भी एक-तिहाई से अधिक फैकल्टी पद लंबे समय से नहीं भरे जा सके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। आईआईटी में नियुक्ति प्रक्रिया बेहद कठोर होने के कारण योग्य उम्मीदवारों का चयन करने में अधिक समय लगता है। दूसरी ओर, उत्कृष्ट पीएचडी धारकों को विदेशों के विश्वविद्यालय, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और अनुसंधान संस्थान बेहतर वेतन और अवसर प्रदान करते हैं, जिससे प्रतिभाशाली शिक्षकों को आकर्षित करना चुनौती बन गया है।
इधर, नए कैंपस, बढ़ती छात्र संख्या और आधुनिक विषयों की शुरुआत ने शिक्षकों की मांग को तेजी से बढ़ाया है, लेकिन उसी अनुपात में योग्य फैकल्टी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस कमी का असर पढ़ाई, शोध कार्य और छात्रों को मिलने वाले शैक्षणिक मार्गदर्शन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संसदीय समिति भी अस्थायी शिक्षकों पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंता जता चुकी है और स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज करने की आवश्यकता पर बल दे चुकी है।
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