अमेरिका-पाकिस्तान AIM-120 मिसाइल सौदा: दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर नई बहस
अमेरिका ने पाकिस्तान को AIM-120C8 और D3 मिसाइलें देने की मंजूरी दी है, जिससे उसकी F-16 क्षमताएं बढ़ेंगी. यह डील दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है. क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ने की आशंका है.

अमेरिका-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती के बीच एक मिसाइल सौदे की बात भी रौशनी में आ चुकी है. अमेरिका ने पाकिस्तान को उन्नत AIM-120 AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missile) मिसाइलें देने की योजना को मंजूरी दे दी है. यह सौदा दक्षिण एशिया के सामरिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही सैन्य संतुलन अत्यंत संवेदनशील है.
सौदे का विवरण
इस डील के तहत पाकिस्तान को F-16 फाइटर जेट्स के लिए AIM-120C8 और AIM-120D3 वर्जन की मिसाइलें प्रदान की जाएंगी. अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस सौदे की अनुमानित राशि 41.6 मिलियन डॉलर तय की है. यह राशि एक बहु-राष्ट्रीय रक्षा अनुबंध का हिस्सा है और मिसाइलों की आपूर्ति मई 2030 तक पूरी किए जाने की योजना है.
दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर असर
यह सौदा ऐसे समय पर आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य और कूटनीतिक संबंध तनावपूर्ण हैं. भारत के पास राफेल और सुखोई जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स हैं, जो मेटियोर और अस्त्र जैसी BVR मिसाइलों से लैस हैं. ऐसे में पाकिस्तान को AIM-120D3 जैसी मिसाइलें मिलना क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकता है.
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