'घरेलू मेड' से विधायक तक का सफर, BJP की टिकट से चुनाव जीती कलिता मांझी की कहानी कर देगी हैरान
कलिता माझी को 2021 में बीजेपी ने टिकट दिया था, ओसोग्राम से चुनाव लड़ रही कलिता ने हार के बावजूद फिर से इस बार चुनाव लड़ने का फैसला किया, और पार्टी के भरोसे पर भी सही साबित हुई. अब कलिता झाड़ू-पोछा नहीं करेंगी बल्कि लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर दस्तखत करेंगी और लोगों की समस्याएं दूर करेंगी.

West Bengal Election Stories: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं. बीजेपी ने कलिता माझी को ओसोग्राम से चुनाव का टिकट दिया था. कलिता की कहानी में हैरान करने वाली बात यह है कि वह बतौर घरेलू मेड के रूप में घरों में काम किया करती थी. मेड से विधायक बनने तक का सफर भारत के सफल लोकतंत्र का सबूत देता नजर आता है.
समाज में काम के प्रति धारणा और सच्चाई
कहा जाता है न कि कोई भी काम छोटा नहीं होता. यह कथन तभी तक अच्छा लगता है जब तक व्यक्ति के काम की चर्चा समाज में न हो. समाज की नजर में काम छोटा-बड़ा होता है. कलिता माझी की तरह दूसरों के घरों में बरतन धोने, झाड़ू लगाने जैसे काम वही करते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हों.
सोशल मीडिया की धारणा और जनता का जवाब
पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले सोशल मीडिया पर ऐसी धारणाएं बनाई गई थी कि यहां की महिलाएं दूसरे राज्यों में मेड का काम करती हैं. बंगाल की जनता ने इसी तंज का बेजोड़ जवाब दिया है और ऐसी ही एक सशक्त महिला को विधायक बना लिया.
4 मई 2026: बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव
4 मई 2026 को बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन का ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला. 15 साल से सत्ता में बनी रही टीएमसी पर जनता ने विश्वास नहीं दिखाया और ममता राज समाप्त हो गया. जनता के इस स्पष्ट आदेश को सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है.
आम लोगों की जीत के अन्य उदाहरण
हम तमिलनाडु में देख सकते हैं, जहां विजय के घर पर ड्राइवर रहे राजेंद्रन के बेटे सबरीनाथन ने चुनाव में जीत हासिल की है. उसी प्रकार बंगाल में कलिता जैसे उम्मीदवारों की कहानी मजबूत विश्वास और मजबूत लोकतंत्र का भी उदाहरण पेश करती हैं. बंगाल की जनता ने अपनी तरह अपने बीच के ही आमजनमानस को मौका दिया है- समाज में बदलाव लाने का. सिर्फ कलिता ही नहीं इस चुनाव से रत्ना देबनाथ और रेखा पात्रा जैसी कई कहानियां भी सामने आई हैं. आरजी कर रेप कांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को जनता ने चुनाव जिताकर ताकत दी है कि वे अपनी बेटी के साथ दरिंदगी कर हत्या करने वाले अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिला सकें.
संघर्ष भरी जिंदगी और मेहनत का सफर
महज ढाई हजार प्रति माह तनख्वाह पर काम करने वाली कलिता की कड़ी मेहनत के बावजूद वेतन बढ़कर साढ़े चार हजार तक पहुंचा था. वह चार घरों में जाकर बरतन धोना, झाड़ू-पोछा करने जैसे घरेलू कामकाज किया करती थी और इसी से उनका परिवार चलता था.
ओसग्राम सीट पर बड़ी जीत
कलिता माझी ने ओसग्राम सीट से बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों से शिकस्त दी है. उनकी यह जीत केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि संघर्ष, मेहनत और ताकत का भी प्रतीक है. सोशल मीडिया पर कलिता की कहानी खूब चर्चा का विषय बनी हुई है. बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने भी इसे नए भारत की ताकत बताया है, जहां एक आम इंसान भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है.
असफलता के बाद सफलता
कलिता माझी का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. 2021 में भी उन्होंने चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन जीतने में सफल नहीं हो सकी थी. उनपर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताया, जो पूरी तरह सही साबित हुआ.
पूरे बंगाल की बात करें तो बहुमत का ख्वाब देखने वाली बीजेपी ने ममता सरकार का सूपड़ा साफ करते हुए 294 में से 206 सीटे अपने नाम की हैं. वहीं ममता बनर्जी को भी जनता ने निजी तौर पर बड़ा झटका दिया और वे अपनी सीट भवानीपुर से भी हार गईं.
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