Giridih: भक्ति की नहीं होती कोई उम्र और सीमा, श्रीमद्भागवत कथा से कथावाचक बृजेश्वरी ने दिया संदेश
गिरिडीह के उदनाबाद में राधा-कृष्ण मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर श्रीमदभागवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया है. जिसके चौथा दिन भारी संख्या में भक्तों की भीड़ कथाश्रवण हेतु उमड़ रही है.

Jharkhand (Giridih): गिरिडीह के ग्राम पंचायत उदनाबाद में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सह राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के चौथे दिन शनिवार को यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े. प्रवचन में आचार्य चंदन कृष्ण शास्त्री ने श्री राम कथा के माध्यम से पार्वती जी के विवाह महोत्सव का बड़े विस्तार के साथ वर्णन किया और समाज को यह संदेश दिया कि शिव सद्गुरु समान हैं और सद्गुरु की आज्ञा की अवहेलना ही भागवत आज्ञा की अवहेलना मानी जाती है. माता सती ने सद्गुरु स्वरूप शिव की आज्ञा का अनुपालन न करते हुए भयंकर कष्ट को पाया और शिव के वियोग को सहन किया, इसलिए सद्गुरु का आश्रय पाकर कई प्रकार के जीव शुद्ध बुद्ध मुक्त हो सकते हैं.
वही वृंदावन धाम से पधारी प्रवाचिका सुश्री कृष्णा बृजेश्वरी ने श्रीमद्भागवत कथा के मध्य ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र से समाज को यह संदेश दिया कि भक्ति की कोई उम्र नहीं होती है और बाल्यावस्था की भक्ति अधिक पुष्ट मानी जाती है. वह पूरा जीवन स्मृति के स्वरूप में बना रहता है, इसलिए भक्ति आरंभ करना हो तो बाल्यावस्था की भक्ति सर्वोपरि है. चौथे दिन शनिवार को अन्न अधिवास कार्यक्रम किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संरक्षक दिलीप उपाध्याय, अध्यक्ष विनय सिन्हा, सचिव उदय वर्मा, कोषाध्यक्ष नरेश यादव, व्यवस्थापक दीपक पंडित, मीडिया प्रभारी दीपक उपाध्याय आदि सक्रिय हैं.
रिपोर्ट: मनोज कुमार पिंटू
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