950 नंबर की परीक्षा में मेहनत से हुआ चयन, फिर क्यों रद्द हुई पूरी JPSC परीक्षा? अब हाईकोर्ट जाएंगे अफसर
राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।


Jharkhand High Court: रांची: राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इसके अलावा छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितता की जांच कराने की बात आदेश में कही गई है।
इस आदेश के बाद 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से नियुक्त पदाधिकारियों में चिंता बढ़ गई है। चयनित अधिकारी अब कार्मिक विभाग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
श्रावणी मेला की ड्यूटी छोड़ रांची पहुंचे कई अधिकारी
बताया जा रहा है कि 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के जरिए नियुक्त कुछ पदाधिकारियों की श्रावणी मेला के दौरान ड्यूटी लगाई गई थी। सरकार का आदेश जारी होने के बाद कई अधिकारी अपनी ड्यूटी छोड़कर रांची पहुंच गए हैं।
इन अधिकारियों का कहना है कि कार्मिक विभाग के आदेश का उनकी नियुक्ति और भविष्य की सेवा पर सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में वे अधिसूचना पर रोक लगाने और अपनी नियुक्ति को प्रभावित नहीं करने की मांग को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं।
TDPL की भूमिका को लेकर चयनित अधिकारियों ने उठाए सवाल
चयनित पदाधिकारियों की ओर से मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि परीक्षा के अलग-अलग चरणों में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL की भूमिका एक जैसी नहीं थी।
उनका कहना है कि यदि परीक्षा के किसी एक चरण में कथित अनियमितता हुई है, तो उसके आधार पर पूरी परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों के परिणाम को रद्द करना उचित नहीं होगा।
PT और Mains में TDPL की भूमिका नहीं होने का दावा
चयनित पदाधिकारियों के अनुसार, 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा यानी PT में TDPL की कोई भूमिका नहीं थी। इसके बाद हुई मुख्य परीक्षा यानी Mains कुल 950 अंकों की थी और उसमें भी TDPL की भूमिका नहीं होने का दावा किया जा रहा है।
वहीं Interview 100 अंकों का था, जिसमें TDPL की भूमिका बताई जा रही है। अंतिम मेरिट सूची कुल 1050 अंकों के आधार पर तैयार हुई थी, जिसमें 950 अंक Mains और 100 अंक Interview के थे।
950 अंकों की लिखित परीक्षा के प्रदर्शन पर हुआ चयन- चयनित अफसर
चयनित अधिकारियों का तर्क है कि कई अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था। हो सकता है कि ऐसे अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अपेक्षाकृत कम अंक मिले हों, लेकिन Mains में अच्छे अंकों के कारण वे अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाने में सफल हुए।
उनका कहना है कि ऐसे अभ्यर्थियों का चयन मुख्य रूप से 950 अंकों की लिखित परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर हुआ, जिसमें TDPL की कोई भूमिका नहीं थी।
ऐसे में सिर्फ इंटरव्यू में कथित अनियमितता के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला उन अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय होगा, जिन्होंने PT और Mains अपनी योग्यता और मेहनत के दम पर पास किया है।
‘पहले पता चले कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए’
चयनित पदाधिकारियों का कहना है कि अगर इंटरव्यू स्तर पर किसी तरह की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो पहले यह तय किया जाना चाहिए कि उसका वास्तविक प्रभाव कितना था और उससे कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
उनके अनुसार, इसके बाद ही अनियमितता की गंभीरता और उसके वास्तविक प्रभाव के आधार पर उचित और अनुपातिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूरी परीक्षा रद्द करने को बताया अनुपातहीन
चयनित अधिकारियों का कहना है कि जब PT और 950 अंकों की Mains परीक्षा में TDPL की कोई भूमिका नहीं थी, तो केवल 100 अंकों के Interview में कथित अनियमितता के आधार पर पूरी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द करना प्रथमदृष्टया अनुपातहीन नजर आता है।
अब चयनित पदाधिकारियों की नजर हाईकोर्ट पर है। वे कार्मिक विभाग के आदेश को चुनौती देकर अपनी नियुक्ति और सेवा को सुरक्षित रखने की मांग करने की तैयारी में हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह साफ होगा कि अदालत इस पूरे विवाद को किस नजरिए से देखती है।

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