बीमा क्लेम लटकाने पर SBI Life पर गिरी गाज, उपभोक्ता आयोग ने ठोका ₹15 हजार का हर्जाना, 30 दिन की मोहलत
पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम के एक अहम मामले में SBI Life Insurance Company Limited को कड़ी फटकार लगाई है।


Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम के एक अहम मामले में SBI Life Insurance Company Limited को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उसके वैध नॉमिनी के क्लेम को बेवजह लंबित रखने को अनुचित मानते हुए कंपनी को पूरी दावा प्रक्रिया तुरंत निपटाने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह की अदालत ने वाद संख्या 10/2025 में यह फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी पर मानसिक प्रताड़ना और वाद खर्च के रूप में कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामी की मौत के बाद भांजे ने किया था क्लेम, कंपनी ने अटकाया था मामला
यह पूरा मामला चाईबासा के मेरी टोला (वार्ड संख्या दो) निवासी राजेश मिंज से जुड़ा हुआ है। शिकायत के अनुसार, उनकी मामी धानिया तिर्की ने SBI Life की 'स्मार्ट मनी बैक गोल्ड' बीमा पॉलिसी ली थी, जिसमें 1 लाख 30 हजार रुपये का सम एश्योर्ड (बीमित राशि) तय था। इस पॉलिसी में धानिया तिर्की ने अपने भांजे राजेश मिंज को 100 प्रतिशत नामित व्यक्ति (नॉमिनी) बनाया था। 26 जनवरी 2024 को पॉलिसीधारक धानिया तिर्की का निधन हो गया। इसके बाद जब नॉमिनी राजेश मिंज ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने कागजात और जानकारी के अभाव का हवाला देते हुए भुगतान को अधर में लटका दिया।
दस्तावेज मिलने के बावजूद दावा अटकाने पर आयोग ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दलील दी कि उसे पॉलिसीधारक की मृत्यु की विधिवत सूचना और आवश्यक दस्तावेज नियमानुसार नहीं मिले थे, जिस कारण क्लेम का निर्धारण नहीं किया जा सका। इस पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पाया कि मृत्यु प्रमाणपत्र और मूल पॉलिसी समेत सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही आयोग और कंपनी के समक्ष पेश किए जा चुके थे। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जब दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं, तो सिर्फ अलग से लिखित मृत्यु सूचना नहीं मिलने के तकनीकी बहाने पर किसी के वैध दावे को महीनों तक लंबित रखना पूरी तरह से गलत है।
15 दिनों में कमियां बताने और 30 दिनों में जांच पूरी करने का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने SBI Life को कड़ा आदेश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को लिखित रूप से यह सूचित करे कि यदि कोई अतिरिक्त कागजात बाकी हैं तो वे क्या हैं। कागजात प्राप्त होने के बाद कंपनी को अगले 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर कारण सहित अपना अंतिम फैसला देना होगा और दावा स्वीकार होने पर बीमित राशि का पूरा भुगतान करना होगा। इसके अलावा आयोग ने पीड़ित को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बीमा कंपनी को 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी चुकाना होगा।

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