तेज रफ्तार रेत वाहनों के कारण सड़कों पर मंडराता मौत का खतरा, गोड्डा में पलटा बेलगाम ट्रैक्टर
बसंतराय प्रखंड स्थित डर्मा पंचायत के सनोर बालू घाट से बालू उठाव शुरू होते ही सड़कों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टरों का तांडव शुरू हो जाता है. नदी से निकलते ही ट्रैक्टर ऐसे दौड़ते हैं मानो रफ्तार पर कोई लगाम ही न हो. साइकिल सवार हों, बाइक चालक हों या पैदल राहगीर इन दिनों ऐसे रेत वाहनों के कारण हर किसी की जान सांसत में है.

JHARKHAND (GODDA): जिले में रेत (बालू) का खनन लगातार बढ़ता जा रहा है. वैध-अवैध रेत खनन के इस बढ़ते व्यापार में एक दूसरे से ज्यादा कमाई करने की आकांक्षा के कारण स्थानीय लोगों को राह चलते भी अब डर बना रहने लगा है. रेत लदे ट्रैक्टर की रफ्तार इतनी अधिक रहती है कि कई बार अनियंत्रित होकर ये ट्रैक्टर दुर्घटनाग्रस्त भी हो जाते हैं.
आज जिस मामले की हम बात कर रहे हैं वह जिले के बसंतराय प्रखंड से संबंधित है. जहां बालू लदे ट्रैक्टर की रफ्तार के कारण सड़कों पर कई बार इन वाहनों के गुजरने से लोगों में दहशत का माहौल बना रहता है. हाल में ऐसी ही बालू से लदी एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर रेत समेत पलट गई. जिसमें हालांकि किसी को जानमाल का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन ऐसा खतरा आए दिन बना रहता है.
बसंतराय प्रखंड स्थित डर्मा पंचायत के सनोर बालू घाट से बालू उठाव शुरू होते ही सड़कों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टरों का तांडव शुरू हो जाता है. नदी से निकलते ही ट्रैक्टर ऐसे दौड़ते हैं मानो रफ्तार पर कोई लगाम ही न हो. साइकिल सवार हों, बाइक चालक हों या पैदल राहगीर इन दिनों ऐसे रेत वाहनों के कारण हर किसी की जान सांसत में है.

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीण बताते हैं कि हर दिन मौत आंखों के सामने से गुजरती है. आज रफ्तार का यही कहर सामने आया, जब बालू लोड ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे पलट गया. संयोग अच्छा था कि इस बार कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन अगर यही ट्रैक्टर किसी इंसान को कुचल देता, तो जिम्मेदार कौन होता? ग्रामीण कहते हैं आज तो बाल-बाल बचे हैं लेकिन रोज यही हाल है. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. प्रशासन इनकी रफ्तार पर रोक लगाए. अब देखना ये है कि प्रशासन बड़ी दुर्घटना के बाद वक्त रहते रेत के इन वाहनों की इस रफ्तार पर ब्रेक लग पाएगा या नहीं.
रेत खनन की जिले में स्थिति
गोड्डा (Godda) में रेत खनन (Sand Mining) एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें अवैध खनन के खिलाफ सख्त कानून हैं, जो पर्यावरण और स्थानीय जल स्रोतों, जैसे नदियों (जैसे मोर नदी) को प्रभावित करता है, और इसके लिए कड़े जुर्माने और सजा (5 लाख रुपये तक और 5 साल तक कैद) का प्रावधान है, लेकिन फिर भी यह अक्सर चर्चा और चिंता का विषय रहता है.
रिपोर्ट: प्रिंस यादव
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