न पढ़ाई से नाता, न भर्ती से वास्ता, फिर हर बवाल में क्यों?, विवादों से रहा है अमिशा प्रसाद का पुराना नाता
लेकिन जब एक पवित्र मकसद से शुरू हुए आंदोलन में अचानक ऐसे लोग घुसने लगें जिनका पढ़ाई-लिखाई या नौकरी की तैयारी से कोई लेना-देना ही नहीं, तो सवाल उठना लाज़मी हो जाता है।

JPSC-JSSC Protest: झारखंड की सड़कों पर इन दिनों लाखों नौजवानों का गुस्सा फूट रहा है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोपों से परेशान छात्र अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। परिवार वालों की उम्मीदें दांव पर लगी हैं और युवा दिन-रात एक करके आंदोलन को जिंदा रखे हुए हैं। लेकिन जब एक पवित्र मकसद से शुरू हुए आंदोलन में अचानक ऐसे लोग घुसने लगें जिनका पढ़ाई-लिखाई या नौकरी की तैयारी से कोई लेना-देना ही नहीं, तो सवाल उठना लाज़मी हो जाता है।
इस आंदोलन में अब कुछ ऐसे चेहरों की एंट्री हो गई है, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है। 21 अगस्त की शाम रांची के शहीद चौक पर छात्रों के पुतला दहन कार्यक्रम में जो हंगामा हुआ, उसके बाद एक लड़की का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है और वह नाम है अमिशा प्रसाद। बताते चलें कि अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला छीने जाने के बाद हुए भारी बवाल में अमिशा प्रसाद का नाम तेजी से सामने आया।

शहीद चौक पर पुतला दहन और हाई-वोल्टेज ड्रामा!
21 अगस्त की शाम राजधानी रांची के शहीद चौक पर छात्रों ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने की तैयारी की थी। माहौल पहले से ही गरमाया हुआ था, लेकिन अचानक एक शख्स ने बीच में आकर पुतला छीनने की कोशिश की और देखते ही देखते वहां अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की, चीख-पुकार और हंगामे के बीच एक लड़की का नाम सबसे ज्यादा उछला-अमिशा प्रसाद। सोशल मीडिया पर एक Video भी तेजी से वायरल होने लगा जिसमें दुपट्टा खींचने और कहा-सुनी का दावा किया गया। 22 अगस्त को पुलिस ने एक्शन लेते हुए अमिशा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जिसके बाद तबीयत बिगड़ने पर उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

न पढ़ाई से नाता, न भर्ती से वास्ता, फिर हर बवाल में क्यों?
जब इस बात की गहराई से पड़ताल की गई कि आखिर अमिशा प्रसाद कौन हैं, तो बेहद हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। वह न तो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा हैं, न ही किसी छात्र की गार्जियन। तो फिर रांची की सड़कों पर छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी की वजह क्या थी? उनके पुराने रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया टाइमलाइन को खंगालने पर पता चला कि यह कोई पहला मामला नहीं है जहां अमिशा किसी बड़े विवाद के केंद्र में दिखाई दी हैं।


हजारीबाग में हत्यारों के ही प्रदर्शन में हो गई थी शामिल
अमिशा का विवादों से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। इसी साल अप्रैल महीने में हजारीबाग के विष्णुगढ़ में एक बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। तब अमिशा 'संपूर्णा संकट मोचन फाउंडेशन' नाम के बैनर तले इस हत्याकांड के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंच गई थी और आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रही थी। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब पुलिस ने असली हत्यारों को पकड़ा। जांच में पता चला कि पुलिस को गुमराह करने और हत्या को धार्मिक रंग देने के लिए खुद आरोपियों ने ही इस प्रदर्शन की साजिश रची थी, जिसमें अमिशा भी जोर-शोर से शामिल थी।

अस्पताल में बखेड़ा और पुलिस का शिकंजा
मामला यहीं नहीं थमा, जून के महीने में अमिशा का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया। इस बार जगह थी रांची का कोकर चौक स्थित सैमफोर्ड अस्पताल। यहां मरीज और परिजनों के साथ बदसलूकी और बाउंसरों से पिटाई के आरोप लगाकर भारी बवाल काटा गया। अस्पताल प्रबंधन ने इसे ब्लैकमेलिंग और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश बताते हुए अमिशा के खिलाफ सदर थाने में SC-ST एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कराई थी।

अब अगस्त में जैसे ही छात्रों ने अपनी वाजिब मांगों को लेकर राजधानी में मोर्चा खोला, अमिशा फिर से मैदान में कूद पड़ीं। ऐसे में अब छात्रों और आम जनता के बीच यही चर्चा गर्म है कि क्या युवाओं के इस संघर्ष को भटकाने के लिए कोई अलग ही खेल खेला जा रहा है।
रांची के कोतवाली थाने में भारी भीड़
पुलिस की इस कार्रवाई की भनक लगते ही बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता थाने पहुंच गए और जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते थाने के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई और पुलिस के साथ तीखी बहस होने लगी। मामले को तूल पकड़ता देख झारखंड बीजेपी के बड़े नेता भी वहां पहुंच गए। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, रांची के विधायक सीपी सिंह और मेयर रोशनी खलखो ने कोतवाली थाने पहुंचकर पुलिस अधिकारियों से सीधा सवाल-जवाब किया। बीजेपी नेताओं ने थाने में करीब चार घंटे तक डेरा डाले रखा, जिससे वहां का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।

सैमफोर्ड अस्पताल में तोड़फोड़ से जुड़ा है मामला
इस पूरे ड्रामे के बीच यह भी साफ हुआ कि आखिर पुलिस ने अमीषा प्रसाद को हिरासत में क्यों लिया था। दरअसल, यह पूरा मामला सदर थाने में दर्ज केस नंबर 286/26 से जुड़ा हुआ है, जो सैमफोर्ड हॉस्पिटल में हुई तोड़फोड़ को लेकर दर्ज किया गया था। इसी सिलसिले में पुलिस अमीषा को पूछताछ के लिए महिला थाना लेकर गई थी। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही मामला पूरी तरह से राजनीतिक हो गया और बीजेपी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया।

7 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद छूटीं अमीषा, फिर बुलाया गया
शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे पुलिस अमीषा प्रसाद को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई थी। BJP नेताओं के भारी दबाव और थाने के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच विधायक सीपी सिंह ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया है कि पूछताछ पूरी होने के बाद अमीषा को सुरक्षित घर भेज दिया जाएगा। आखिरकार शाम करीब 7 बजकर 20 मिनट पर, यानी 7 घंटे से ज्यादा की लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने अमीषा को छोड़ दिया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया है। देर शाम तक कोतवाली थाना परिसर में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ डटी रही, जिससे पूरे दिन थाने में हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।

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