झारखंड में SIR पर सियासी संग्राम: आमने-सामने आए JMM, कांग्रेस और भाजपा
झारखंड में SIR (सत्यापन) प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. बंगाल में 90 लाख वोटरों के नाम कटने के बाद JMM और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा ने इसे फर्जी वोटरों को हटाने के लिए जरूरी कदम बताया है.

Jharkhand (Ranchi): झारखंड में SIR (वोटर लिस्ट सत्यापन) की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. बंगाल में हाल ही में 90 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने की खबरों ने झारखंड में सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की चिंता बढ़ा दी है. जेएमएम और कांग्रेस जहां इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा इसे चुनावी शुद्धिकरण का नाम दे रही है.
जेएमएम और कांग्रेस की आशंकाएं
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर और सांसद विजय हांसदा का कहना है कि पार्टी को सत्यापन से डर नहीं है, लेकिन जिस तरह बंगाल में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, उससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. जेएमएम ने इसे 'सतर्क रहने' का वक्त बताया है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने SIR को भाजपा का "सबसे बड़ा चुनावी टूलकिट" करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इसके जरिए विपक्षी दलों के वोटरों को निशाना बना रही है.
भाजपा का पलटवार
दूसरी ओर, भाजपा विधायकों- उज्ज्वल दास, मंजू देवी और सत्येंद्र तिवारी ने मोर्चा खोलते हुए कहा कि झारखंड के कई जिलों में 2014 से 2024 के बीच मतदाताओं की संख्या में 80% तक की असामान्य बढ़ोतरी हुई है. भाजपा का दावा है कि जेएमएम और कांग्रेस को अपने "अवैध वोटरों" के नाम कटने का डर सता रहा है. भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि अब "ना खाता ना बही", फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा.
निष्पक्षता की चुनौती
वर्तमान में राज्य के तीनों प्रमुख दलों के रुख स्पष्ट हैं. जहां भाजपा इसे फर्जी वोटरों पर कार्रवाई मानती है, वहीं JMM-कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं. अब देखना यह है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक विवादों के बीच कितनी निष्पक्ष और भरोसेमंद साबित होती है.
रिपोर्ट: सत्यव्रत किरण
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